Edited By Ramkesh,Updated: 07 Apr, 2026 03:56 PM

असम में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान आज शाम समाप्त हो जाएगा। असम की 126 सीटों के लिए मतदान गुरुवार यानी 9 अप्रैल हो को एक ही चरण में होगा। आइए हम आप को एक समीकरण आधार पर समझाते हैं कि इस चुनाव बीजेपी सत्ता में वापसी करेगी या...
नेशनल डेस्क: असम में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान आज शाम समाप्त हो जाएगा। असम की 126 सीटों के लिए मतदान गुरुवार यानी 9 अप्रैल हो को एक ही चरण में होगा। आइए हम आप को एक समीकरण आधार पर समझाते हैं कि इस चुनाव बीजेपी सत्ता में वापसी करेगी या कांग्रेस का 10 साल का वनवास खत्म हो जाएगा।
असम की 126 सीटों का पूरा गुणा-गणित
अगर बता असम विधान की सभी 126 सीटों का करें तो यहां पर चुनाव एक जैसा नहीं बल्कि तीन अलग-अलग क्षेत्र हैं और हर एक क्षेत्र का अपना सियासी मिजाज है। ऐसे में ऊपरी असम में 35 विधानसभा सीटें आती है तो मध्य असम जिसे बोडोलैंड के नाम से जाना जाता है, उसमें 41 सीटें आती हैं। निचले असम में 50 विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में साफ है कि असम का निचला इलाका ही सत्ता के समीकरण को बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है।
मुस्लिम वोटर्स निर्णायक
निचले असम का इलाका बांग्लादेश से सटा हुआ है, जहां पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक हैं। इस क्षेत्र में 50 सीटें आती हैं, जिसमें से एनडीए के पास 23 सीटों तो कांग्रेस-एआईयूडीएफ ने 27 सीटें जीती थी. धुबरी, बारपेटा,गोलपाड़ा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में है, जहां पर कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के बीच मुकाबला, क्योंकि पिछली बार एआईयूडीएफ 16 सीटें जीती थी, लेकिन हालात इस बार बदले हुए हैं।
2021 में भाजपा गठबंधन को मिली थी शानदार जीत
बात करें 2021 विधानसभा चुनाव की तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत हासिल कर सत्ता में बनी थी NDA (बीजेपी+): 75 सीटें हासिल की थी। जबकि कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थी इस प्रकार कांग्रेस पार्टी को विपक्ष की भूमिका में रहना पड़ा था। कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में उसे बढ़त मिली, लेकिन वह सत्ता से दूर ही रहा। चुनाव के दौरान विकास, पहचान और नागरिकता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। मतदाताओं ने स्थिर सरकार और विकास के एजेंडे पर भरोसा जताते हुए भाजपा गठबंधन को दोबारा मौका दिया।
कांग्रेस के लिए “करो या मरो” की स्थिति
असम में 2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के सामने “करो या मरो” की स्थिति है क्योंकि कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है। हालांकि पिछले चुनावों के नतीजे पार्टी के लिए निराशाजनक रहे थे, जिससे उसकी स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
असम में कैडर को एकजुट करना कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कैडर को एकजुट करना और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल और गठबंधन की रणनीति भी अहम भूमिका निभाएगी। राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, बाढ़ और विकास जैसे मुद्दों को कांग्रेस प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रही है, ताकि जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जा सके। वहीं पार्टी युवाओं और किसानों को साधने के लिए भी अलग-अलग अभियान चला रही है।
कांग्रेस के लिए सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं राजनीतिक साख बचाने की बड़ी चुनौती
हालांकि भारतीय जनता पार्टी की मजबूत स्थिति और संगठनात्मक पकड़ कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में 2026 का चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख को दोबारा स्थापित करने की भी परीक्षा होगा। अगर देखा जाय तो राहुल गांधी के सामने असम में आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए “करो या मरो” की स्थिति जैसा है, जहां उसे अपनी रणनीति और नेतृत्व दोनों को प्रभावी ढंग से पेश करना होगा। फिलहाल देखना होगा कि क्या कि कांग्रेस इस चुनाव में जीत दर्ज कर पाती है या फिर असम की जनता ने एक बार फिर एनडीए पर भरोसा जताया कर बीजेपी को तीसरी बार सत्ता में मौका देती है। हालंकि ये सब 4 मई को ही साफ होगा कि वहां पर जनता अपना बहुत किसे देती है।