डच कम्पनी चीन को नहीं बेचेगी चिप बनाने वाली मशीन

Edited By Updated: 08 Jul, 2023 06:14 AM

dutch company will not sell chip making machine to china

चीन की मंशा अमरीका को सैन्य और आर्थिक शक्ति में पछाड़कर उसकी जगह लेना है, ऐसे में अमरीका भी खुद के बचाव और विनाशकारी चीन को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अपने स्तर पर तैयारी कर रहा है। फिलहाल अमरीका नहीं चाहता कि चीन माइक्रोचिप तकनीक में अमरीका या किसी...

चीन की मंशा अमरीका को सैन्य और आर्थिक शक्ति में पछाड़कर उसकी जगह लेना है, ऐसे में अमरीका भी खुद के बचाव और विनाशकारी चीन को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अपने स्तर पर तैयारी कर रहा है। फिलहाल अमरीका नहीं चाहता कि चीन माइक्रोचिप तकनीक में अमरीका या किसी पश्चिमी देश से आगे निकले। इसके लिए अमरीका ने अपने देश की माइक्रो चिप बनाने वाली कम्पनियों के साथ अपने मित्र देशों को भी चेताया है कि चीन को माइक्रोचिप बनाने वाली मशीनें न बेचें जिससे वे चिप तकनीक में पश्चिमी देशों से आगे निकलें। 

अमरीका के दबाव में नीदरलैंड्स की (डच) सरकार अब चीन को अपनी माइक्रोचिप बनाने की मशीनें नहीं बेचने की नीति को जल्दी लागू करने वाली है। अगले सप्ताह डच सरकार नई निर्यात नीति को लागू कर अपने देश की सबसे उच्च स्तरीय कम्पनी ए.एस.एम.एल. होल्डिंग्स के लिए आदेश जारी करेगी कि वह अपनी मशीनों को चीन का निर्यात न करे। सिर्फ इतना ही नहीं नीदरलैंड्स की यह कम्पनी किसी भी एशियाई देश को अपनी खास तीन अलग तरह के मॉडल बनाने वाली माइक्रोचिप मशीनें नहीं बेचेगी। हालांकि सूत्र बताते हैं कि माइक्रोचिप बनाने वाली ए.एस.एम.एल. कम्पनी को ऐसा करना अच्छा नहीं लग रहा है क्योंकि इससे उसके आॢथक हित जुड़े हुए हैं लेकिन उसे अपनी सरकार के दबाव में यह फैसला लेना पड़ रहा है। 

ए.एस.एम.एल. द्वारा तैयार होने वाली एक्सपोर्ट कंट्रोल रैगुलेशन को यूरोपीय संघ के कानून के जानकार इसे ब्लू पिं्रट के तौर पर भी जारी करेंगे जो दूसरे यूरोपीय देश भी लागू करेंगे। इस रैगुलेशन को जुलाई के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा। इसके बाद न सिर्फ अमरीका के यूरोपीय मित्र देश बल्कि यूरोप के बाकी देश भी चीन को अपनी आधुनिकतम तकनीक नहीं बेचेंगे लेकिन इन देशों में से कुछ को इस बात का डर भी है कि कहीं चीन ये तकनीक देसी स्तर पर खुद ही विकसित न कर ले क्योंकि अगर चीन ने ऐसा किया तो इन देशों को चीन से होने वाली कमाई खत्म हो सकती है। 

जानकारों का कहना है कि ये यूरोपीय देश बिना किसी कारण से डर रहे हैं क्योंकि जो मशीनें चीन मंगवाना चाहता है वे मशीनें बनाने में कुछ वर्ष नहीं बल्कि दशक लगते हैं और जब तक चीन इन मशीनों को बनाएगा उस समय तक तकनीक कहीं आगे निकल चुकी होगी। 

जिन मॉडलों पर प्रतिबंध लगा है उनमें ट्विन स्कैन एन.एक्स.टी. 2000 आई, एन.एक्स.टी 2050 आई और एन.एक्स.टी. 2100 आई शामिल हैं। ये सर्वोोच्चम स्तर की अल्ट्रावायलेट लिथोग्राफी मशीनें हैं। इनके किसी भी चीनी कम्पनी को भेजे जाने पर प्रतिबंध लगा है। इस मुद्दे पर अमरीकी शीर्ष राजनीतिक लोग और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रुड एकमत हैं और इस मुद्दे पर ए.एस.एम.एल. कम्पनी के सी.ई.ओ. पीटर वेन्निक भी इनकी चिंताओं से सहमत हैं क्योंकि वह भी नहीं चाहते कि चीन किसी गलत काम के लिए उनकी कम्पनी की तकनीक का इस्तेमाल करे। इतने बड़े स्तर पर दुनिया के शीर्ष और विकसित देशों के प्रयासों के बाद ऐसा नहीं लगता है कि चीन सैमी कंडक्टर बनाने में सफलता हासिल कर पाएगा, न ही चीन साइबर हमला कर इन कम्पनियों की खुफिया जानकारी ही हासिल कर सकता है क्योंकि चीन की ऐसी हरकतों के कारण दुनिया भर की कम्पनियां अब सतर्क हो गई हैं।

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