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11 अक्तूबर को खैबर पख्तूनख्वा (के.पी.के.) में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किए जाने को इस्लामाबाद द्वारा मुख्य रूप से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और...
27 अक्तूबर, 2026 को बाबासाहेब आंबेडकर की जालंधर की युगप्रवर्तक यात्रा के 75 वर्ष पूरे हो गए। यह बड़े सम्मान और गर्व की बात है कि इस यात्रा के दौरान...
व्हाट्सऐप पर संदेश फॉरवर्ड करने वाला व्यक्ति हर सुबह एक उद्देश्य के साथ जागता है। जब हममें से बाकी लोग दांत साफ कर रहे होते हैं और यह सोच रहे होते...
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल, जिन्होंने चार वर्षों तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद शीर्ष अदालत के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के...
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बचपन से सिखाया जाता है कि ईश्वर, वाहे गुरु, अल्लाह, यीशु या किसी भी धर्म के प्रवर्तक, दु:खों का निवारण करते हैं और कर्मों का फल देने की शक्ति रखते हैं इसलिए उनका स्मरण करना ही दिन का सबसे पहला काम है। यह सामान्य व्यक्ति के लिए उसके धर्म के पालन की बात है। जो किसी को नहीं मानते यानी कि नास्तिक, वे भी घोर संकट से घिरने पर परम शक्ति का महत्व समझ जाते हैं और प्रार्थना करने लगते हैं।
गत कुछ वर्षों से भीषण गर्मी पड़ रही है और इसका प्रकोप हर साल बढ़ता जा रहा है। गर्मियों में कई इलाकों में तो तापमान 47 डिग्री सैल्सियस से भी ऊपर चला जाता है। अधिक गर्मी के कारण बिजली की खपत और डिमांड लगातार बढ़ रही है। यह बात भी सही है कि औद्योगिक क्रांति जरूरी है, क्योंकि जैसे-जैसे उद्योग अधिक लगेंगे, लोगों को रोजगार मिलेगा। जमीन का भी दाम बढ़ेगा।
पंजाब के कई राजनेताओं, विशेष रूप से मनप्रीत सिंह अयाली के पुनर सुरजीत अकाली दल छोड़कर अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ में शामिल होने और कई अन्य पाॢटयों के नेताओं द्वारा ‘वारिस पंजाब दे’ में शामिल होने के कारण पंथक राजनीति एक बार फिर नए दौर में प्रवेश कर रही है। लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (बादल) को पंथक राजनीति का मुख्य केंद्र माना जाता रहा लेकिन अब अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ और अकाली दल ‘पुनर सुरजीत’ जैसी ताकतों के सक्रिय होने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
भारतीय लोकतंत्र की मजबूती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर टिकी है लेकिन जब कोई फिल्म संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं को छूती है, तो सरकारी तंत्र अक्सर उसे दबाने की कोशिश करता है। हाल ही में दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ (पहले ‘पंजाब 95’) का मामला इसकी ताजा मिसाल है। ओ.टी.टी. पर रिलीज होने के मात्र 2-3 दिन बाद फिल्म की भारत में उपलब्धता बंद कर दी गई। यह घटना न सिर्फ सैंसरशिप की बहस को फिर से जीवंत करती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या लोकतंत्र में सरकार को फिल्मों पर इस तरह अंकुश लगाने का अधिकार
देश तेजी से अराजकता की ओर बढ़ रहा है। अराजकता, बिना किसी शक के सरकारों के असंतोषजनक प्रदर्शन से उपजे लोगों के स्वत:स्फूर्त गुस्से में से पैदा होती है। परंतु लुटेरी शासक जमातें और इनके मोहरे बने प्रतिक्रियावादी तत्व भी इसे अक्सर हवा देते हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसफ विजय की जीत के रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद पहली बार चुनाव मैदान में उतर गए हैं। वह बिहार के बांकीपुर से विधानसभा का उप चुनाव लड़ेंगे।
जमानत निर्णयों और आरक्षित निर्णयों की घोषणा के लिए सख्त समय-सीमा लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश भारत के जमानत न्यायशास्त्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं, बशर्ते इन आदेशों को निरंतर निगरानी, प्रणालीगत सुधारों और न्यायिक प्रथाओं में बदलाव का समर्थन प्राप्त हो।
किसी भी बच्चे के जीवन में शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है लेकिन शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती। जीवन की सबसे पहली और सबसे प्रभावशाली शिक्षा बच्चे को अपने घर से प्राप्त होती है। विशेष रूप से बेटियों के लिए मां-बाप का घर ही सबसे बड़ा विद्यालय होता है, जहां वे जीवन जीने की कला, संस्कार, नैतिक मूल्य, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार सीखती हैं। माता-पिता ही उनके प्रथम शिक्षक होते हैं और परिवार उनका पहला विद्यालय।
पंजाब के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक इतिहास में 78 वर्षों के पश्चात पहली बार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज्ज द्वारा जारी किए गए हुक्मनामे की तामील करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री तथा ‘आप’, कांग्रेस और अकाली पार्टी के विधायक 29 जून, 2026 कों सिखों के सर्वोच्च तख्त के सचिवालय में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026 के बारे में जानकारी देने के लिए पहुंचे।
हर वर्ष कहानी वही होती है। मानसून देश के विभिन्न राज्यों में दस्तक देता है और भारत मानो उसके सामने घुटने टेक देता है। सड़कें नदियों में बदल जाती हैं, गड्ढे खाइयों का रूप ले लेते हैं, अंडरपास जलाशयों में तबदील हो जाते हैं, जाम नालियां उफनने लगती हैं, बदबूदार सीवर का पानी घरों में घुस जाता है, लोग खुले मैनहोल में समा जाते हैं, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन चरमराने लगते हैं, पुल ढह जाते हैं, भूस्खलन गांवों को निगल जाता है और हमारी तथाकथित ‘विश्वस्तरीय’ स्मार्ट सिटी प्रशासनिक लकवे की तैरती हुई नुमाइश ब
दुनिया भर में प्रवासन आज सबसे अधिक चॢचत विषयों में से एक है। एक समय था जब विकसित देश प्रवासियों का खुले दिल से स्वागत करते थे लेकिन अब स्थिति बदल रही है। यूरोप, अमरीका और अन्य विकसित देशों में प्रवासियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसके बावजूद यूरोप का एक देश स्पेन इस प्रवृत्ति के विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने प्रवासियों को आॢथक विकास का साधन माना है और बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों को देश में आने की अनुमति दी है। यही कारण है कि आज स्पेन यूरोप की
‘कांग्रेसी भी कांग्रेस को हराते हैं’, यह कहावत जिन्हें मजाक लगती हो, उन्हें पंजाब का हाल देख लेना चाहिए। सीमावर्ती पंजाब उन चंद राज्यों में है, जहां कांग्रेस सत्ता में नहीं है, पर सत्ता की दावेदार अवश्य है। 2022 में अपनी गलतियों से भी पंजाब की सत्ता गंवाने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने वहां अच्छा प्रदर्शन किया।
गाजा पर सोनिया गांधी का लेख नैतिकता का पाठ नहीं, बल्कि चयनात्मक आक्रोश का एक जीवंत उदाहरण है। भारत को मानवाधिकारों का उपदेश देने से पहले कांग्रेस नेतृत्व को स्वतंत्र भारत के सबसे काले अध्यायों में से एक, 1984 के सिख विरोधी नरसंहार और उसके बाद पंजाब में वर्षों तक चले दर्द और पीड़ा का जवाब देना चाहिए।
पंजाब की कहानी अक्सर उसकी मजबूती, समृद्धि और राष्ट्र-निर्माण में दिए गए योगदान के संदर्भ में सुनाई जाती है। लेकिन आधुनिक पंजाब का इतिहास राजनीतिक विश्वासघात और सामाजिक उथल-पुथल की भी कहानी है, जिसने धीरे-धीरे पंजाब की ताकतों को कमजोर किया।
पिछले सप्ताह, 19 जून को, शिवसेना ने अपनी 60वीं वर्षगांठ मनाई। अपनी स्थापना के बाद से, पिछले 60 वर्षों में, पार्टी ने कई विभाजन देखे हैं, जिनमें से नवीनतम 26 जून को हुआ। शिव सेना की 60वीं वर्षगांठ को 2 गुटों-ठाकरे की सेना (यू.बी.टी.) और एकनाथ शिंदे की सेना द्वारा विवादित माना जा रहा है, जिनमें से प्रत्येक पार्टी की मूल वैचारिक विरासत का दावा कर रहा है।
इस समय दुनिया भर में बचपन से संबंधित नीतियों को नए सिरे से गढ़ा और विचारा जा रहा है। वे सरकारें जो कभी इंटरनैट को इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक साधन बताकर इसकी सराहना करती थीं, अब एक ऐसा सवाल पूछ रही हैं, जिसे उठाना एक दशक पहले बेहद वर्जित प्रतीत होना था-क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति होनी चाहिए?
मेष राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक रहेगा। आज मेहनत का बेहतरीन परिणाम मिल सकता है। नए लोगों से
वृष राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। व्यापार में पुराने मित्र से
मिथुन राशि वालों आज का दिन आपके लिए फेवरेबल रहेगा। आज युवाओं को नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। दफ्तर में
कर्क राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। ऑफिस में आपके विचारों को महत्व मिल सकता है।
सिंह राशि वालों आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। जीवनसाथी के
कन्या राशि वालों आज का दिन आपके लिए फेवरेबल रहेगा। प्रॉपर्टी के काम से क्षेत्र से जुड़े लोगों को कोई नया प्रोजेक्ट मिल
तुला राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। करियर में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। किसी नए काम
वृश्चिक राशि वालों आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। आर्थिक रूप से राहत बनी रहेगी। आज अचानक से किसी
धनु राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। व्यापार के कामकाज में तेजी बनी रहेगी। आय के नए स्रोत
मकर राशि वालों आज का दिन आपके लिए शानदार रहेगा। व्यापार में वृद्धि होने के संकेत हैं। जीवनसाथी के सहयोग से रुके हुए
कुंभ राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। पहले से निवेश किया गया धन वापस मिल सकता है। नौकरीपेशा
मीन राशि वालों आज का दिन आपके लिए बेहतर रहेगा। दोस्तों के साथ किसी स्थान पर घूमने जा सकते हैं। बिज़नेस में
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29/10/2026 06:30 IST
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