Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 Sep, 2026 03:14 PM

तुर्की के वित्तीय बाजार में लिक्विडिटी संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। तुर्की की सबसे बड़ी फंड मैनेजमेंट कंपनियों में से एक निवेशकों की पैसे निकालने की मांग को पूरा करने में नाकाम रहा। इसके बाद एक अन्य फंड मैनेजर ने भी करीब 7.5 अरब डॉलर के फंड्स...
नई दिल्लीः तुर्की के वित्तीय बाजार में लिक्विडिटी संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। तुर्की की सबसे बड़ी फंड मैनेजमेंट कंपनियों में से एक निवेशकों की पैसे निकालने की मांग को पूरा करने में नाकाम रहा। इसके बाद एक अन्य फंड मैनेजर ने भी करीब 7.5 अरब डॉलर के फंड्स से जुड़ी ऐसी ही समस्या की जानकारी दी।
इस खबर के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और उन्होंने फंड्स से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों ने एक ही दिन में करीब 1 अरब डॉलर तक की निकासी की। इसका असर तुर्की के शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। तुर्की के शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि इससे एक दिन पहले भी बाजार करीब 2% टूट चुका था।
सरकार और नियामकों ने उठाए कदम
बढ़ते दबाव के बीच तुर्की के अधिकारियों ने वित्तीय प्रणाली में नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। इंटरबैंक उधारी की सीमा को 10 गुना बढ़ाया गया है। इसके अलावा, कुछ फंड्स को समाप्त (लिक्विडेट) करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
कैसे बढ़ सकता है संकट?
लिक्विडिटी संकट में सबसे बड़ा जोखिम यह होता है कि फंड्स को निवेशकों की निकासी पूरी करने के लिए अपने पास मौजूद शेयर और अन्य परिसंपत्तियां बेचनी पड़ती हैं। अगर बड़ी संख्या में फंड एक साथ परिसंपत्तियां बेचते हैं, तो उनकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
कीमतों में गिरावट से निवेशकों में और घबराहट पैदा हो सकती है। इसके बाद और निवेशक अपना पैसा निकालने की मांग कर सकते हैं। इससे फंड्स पर नकदी जुटाने का दबाव और बढ़ जाता है और उन्हें और ज्यादा परिसंपत्तियां बेचनी पड़ सकती हैं।