रोजगार संकट से निपटने के लिए उद्योग जगत की बड़ी पहल, 10 करोड़ जॉब्स का प्लान

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 06:20 PM

major initiative by the industry to tackle the employment crisis

देश में रोजगार की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए उद्योग जगत के दिग्गजों ने सोमवार को ‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ नाम से एक बड़ी राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की। इस मिशन का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में भारत में 10 करोड़ नए रोजगार अवसर पैदा करना है। यह कदम ऐसे समय...

बिजनेस डेस्कः देश में रोजगार की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए उद्योग जगत के दिग्गजों ने सोमवार को ‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ नाम से एक बड़ी राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की। इस मिशन का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में भारत में 10 करोड़ नए रोजगार अवसर पैदा करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब देश तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद पर्याप्त रोजगार सृजन की समस्या से जूझ रहा है।

इस पहल की घोषणा सॉफ्टवेयर उद्योग संगठन नैसकॉम के सह-संस्थापक हरीश मेहता, वैश्विक उद्यमी नेटवर्क द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (TIE) के संस्थापक ए. जे. पटेल और सेंटर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक पॉलिसी (CIPP) के संस्थापक यतीश राजावत ने संयुक्त रूप से की।

संस्थापकों के मुताबिक, भारत में कार्यशील आयु की आबादी हर साल लगभग 1.2 करोड़ की दर से बढ़ रही है, जबकि विनिर्माण जैसे पारंपरिक रोजगार क्षेत्र अपेक्षित गति से विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में देश को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा फायदा उठाने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नई नौकरियां सृजित करने की जरूरत है।

हालांकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन रोजगार की रफ्तार उत्पादन और आर्थिक विस्तार के मुकाबले पीछे रही है। स्वचालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से कई क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की नौकरियां कम हो रही हैं, जिससे यह आशंका गहराने लगी है कि आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बीच दूरी बढ़ सकती है।

‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ मिशन के तहत उद्यमिता, कौशल विकास और श्रम-प्रधान उद्योगों को भारत की रोजगार नीति के केंद्र में रखा गया है। इस पहल का उद्देश्य रोजगार सृजन को आर्थिक प्रगति का प्रमुख पैमाना बनाना है, ताकि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित की जा सके।

हरीश मेहता ने कहा कि यह पहल उद्यमियों, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्योगों (MSME) और नियोक्ताओं को सशक्त बनाने का एक संगठित प्रयास है, जिसमें कौशल, उद्यम, डेटा और नीति के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा।

वहीं ए. जे. पटेल ने कहा कि स्टार्टअप और छोटे उद्योग, जो भारत के जीडीपी में करीब 30 प्रतिशत योगदान देते हैं और सबसे बड़े नियोक्ता हैं, उनका विस्तार बड़े शहरों से आगे होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर देश को हर साल 80–90 लाख नौकरियां पैदा करनी हैं, तो उद्यमिता के रास्ते में मौजूद ढांचागत बाधाओं को दूर करना होगा, ताकि यह आम लोगों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन सके।
 

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