Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Feb, 2026 12:57 PM

चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। तेज रफ्तार से रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब बाजार में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर चांदी...
बिजनेस डेस्कः चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। तेज रफ्तार से रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब बाजार में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर चांदी फिसलकर करीब ढाई लाख रुपए प्रति किलो के आसपास आ गई है। इससे पहले चांदी ने लगभग 4.20 लाख रुपए प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, जिसके बाद लगातार मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव के चलते कीमतों में कमजोरी बनी हुई है। फिलहाल चांदी 2.30 लाख से 2.70 लाख रुपए प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है। 13 फरवरी को MCX पर चांदी 2.41 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही है।
निवेशकों में चिंता क्यों बढ़ी?
निवेशक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि गिरावट आगे भी जारी रहेगी या चांदी फिर से तेजी पकड़ सकती है। हालिया गिरावट के पीछे कई कारण सामने आए हैं—
अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़े: मजबूत डेटा से ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम हुई है।
डॉलर की मजबूती: डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी महंगी पड़ती है, जिससे मांग पर असर पड़ता है।
मुनाफावसूली: रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद बड़े निवेशकों ने तेजी से प्रॉफिट बुक किया, जिससे कीमतों में दबाव बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट का असर दिखा। COMEX पर सिल्वर 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से तेजी से नीचे आया, जिसका असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में चांदी पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि डॉलर मजबूत है और वैश्विक अनिश्चितताएं जारी हैं। हालांकि लंबी अवधि में सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक सेक्टर में बढ़ती मांग कीमतों को सहारा दे सकती है।
कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट बाजार की अस्थिरता को दिखाती है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए लंबी अवधि की रणनीति और जोखिम प्रबंधन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।