Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Feb, 2026 12:41 PM

घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर कमजोरी देखने को मिल रही है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 पर बिकवाली का दबाव बढ़ने से पिछले तीन दिनों की तेजी थम गई। कमजोर वैश्विक संकेतों, मेटल शेयरों में गिरावट और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार लाल निशान में कारोबार...
बिजनेस डेस्कः घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर कमजोरी देखने को मिल रही है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 पर बिकवाली का दबाव बढ़ने से पिछले तीन दिनों की तेजी थम गई। कमजोर वैश्विक संकेतों, मेटल शेयरों में गिरावट और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स करीब 508 अंकों तक टूटकर 83,309.17 के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 164.4 अंक फिसलकर 25,611.60 तक आ गया। ब्रोडर मार्केट में स्मॉलकैप शेयरों पर ज्यादा दबाव दिखा, जबकि निफ्टी में महज कुछ ही शेयर हरे निशान में रहे।
सेक्टोरल स्तर पर मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर सबसे ज्यादा असर डाला और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिर गया। दूसरी ओर ट्रेंट, टाटा स्टील और एसबीआई जैसे कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जबकि इंडिगो, एटर्नल और एशियन पेंट्स जैसे शेयरों पर दबाव रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 0.42 फीसदी गिरकर 83,469 के आसपास और निफ्टी 0.44 फीसदी फिसलकर 25,662 के करीब ट्रेड करता दिखा।
बाजार में गिरावट की वजहें
बाजार में गिरावट की कई वजहें सामने आई हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद आई तेजी के चलते निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की। साथ ही एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों का मनोबल कमजोर किया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सैंग समेत प्रमुख एशियाई इंडेक्स लाल निशान में रहे, जबकि अमेरिकी बाजार भी मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए।
विदेशी निवेशकों की हल्की खरीदारी और आरबीआई की मौद्रिक नीति के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता भी दबाव की वजह बनी। इंडिया VIX में उछाल से बाजार में अस्थिरता बढ़ने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा सेंसेक्स के वीकली डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के चलते भी बाजार में उतार-चढ़ाव तेज रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में बाजार कंसोलिडेशन के दौर से गुजर सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।