World Bank ने बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान, 7.2% की रफ्तार से दौड़ेगी Indian Economy

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 12:39 PM

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वर्ल्ड बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और तेज निजी खपत का हवाला देते हुए FY26 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2% कर दिया है। इससे पहले जून 2025 में यह अनुमान 6.3% लगाया गया था।

बिजनेस डेस्कः वर्ल्ड बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और तेज निजी खपत का हवाला देते हुए FY26 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2% कर दिया है। इससे पहले जून 2025 में यह अनुमान 6.3% लगाया गया था।

वर्ल्ड बैंक का कहना है कि कर सुधारों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ती वास्तविक घरेलू आय से आर्थिक गतिविधियों को मजबूत समर्थन मिल रहा है।

आगे के सालों का आउटलुक

वर्ल्ड बैंक की ताजा ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स (GEP) रिपोर्ट के मुताबिक—

  • FY27 में ग्रोथ घटकर 6.5% रहने का अनुमान है, यह मानते हुए कि अमेरिका की ओर से लगाए गए 50% टैरिफ पूरे अनुमानित समय तक लागू रहेंगे।
  • FY28 में ग्रोथ फिर बढ़कर 6.6% हो सकती है, जिसे मजबूत सर्विस सेक्टर, निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी का सहारा मिलेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय निर्यात पर ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के बावजूद FY27 का ग्रोथ अनुमान जून के अनुमान के बराबर रखा गया है, क्योंकि मजबूत घरेलू मांग टैरिफ के नकारात्मक असर की भरपाई कर सकती है।

NSO के अनुमान से थोड़ा कम

FY26 के लिए वर्ल्ड बैंक का 7.2% ग्रोथ अनुमान, नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा 7 जनवरी को जारी किए गए 7.4% के अनुमान से थोड़ा कम है।

दक्षिण एशिया पर फोकस

दक्षिण एशिया के लिए, 2025 में ग्रोथ 7.1% रहने की उम्मीद है, जो भारत की मजबूत आर्थिक गतिविधियों से प्रेरित है। 2026 में ग्रोथ घटकर 6.2% रह सकती है, जो भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ के असर को दर्शाती है।

ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, वैश्विक ग्रोथ 2026 में 2.6% रहने की उम्मीद है, जो 2025 में 2.7% थी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2.1% से बढ़कर 2.2% हो सकती है। चीन की ग्रोथ 4.9% से घटकर 4.4% रहने का अनुमान है।

वर्ल्ड बैंक ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने कहा कि हर गुजरते साल के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था ग्रोथ पैदा करने में कम सक्षम होती जा रही है और नीतिगत अनिश्चितताओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊंचे सरकारी और निजी कर्ज के बीच तेज और स्थिर आर्थिक वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
 

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