Edited By Prachi Sharma,Updated: 12 Feb, 2026 11:00 AM

Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर के भीतर बने लगभग 15 मंदिरों को मार्च महीने में श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। हालांकि इन सभी मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षित पुजारियों की नियुक्ति अभी...
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Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर के भीतर बने लगभग 15 मंदिरों को मार्च महीने में श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। हालांकि इन सभी मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षित पुजारियों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। मंदिर ट्रस्ट का अर्चक प्रशिक्षण कार्यक्रम फिलहाल शुरू नहीं हुआ है, ऐसे में मौजूदा 20 पुजारियों की टीम ही रोटेशन व्यवस्था के तहत सभी जिम्मेदारियां निभा रही है।
जानकारी के अनुसार, परकोटा क्षेत्र में बने मंदिरों की दीवारों पर तैयार किए गए भित्ति-चित्र की अंतिम फिनिशिंग और साफ-सफाई का कार्य अंतिम चरण में है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इन मंदिरों को आम भक्तों के दर्शन के लिए खोला जाएगा।
परिसर में कुल करीब 15 मंदिरों में नियमित पूजा का प्रावधान है, लेकिन धार्मिक समिति ने अब तक अतिरिक्त अर्चकों की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। अर्चकों के दूसरे बैच का प्रशिक्षण भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में यदि मार्च में सभी मंदिर खोल दिए जाते हैं, तो वर्तमान 20 पुजारियों पर ही पूजा व्यवस्था की जिम्मेदारी रहेगी।
वर्तमान पूजा व्यवस्था
इस समय परकोटा के छह मंदिरों के साथ शेषावतार मंदिर और कुबेर टीला स्थित भगवान शिव मंदिर में नियमित पूजा हो रही है। कुल 20 अर्चक तैनात हैं। इनमें चार वरिष्ठ पुजारी हैं, जो तीन दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं, जबकि 16 पुजारी हाल ही में प्रशिक्षण प्राप्त कर नियुक्त किए गए हैं। प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास के निधन के बाद प्रधान पुजारी का पद समाप्त कर दिया गया है।
वेतन असमानता से असंतोष
सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे चार वरिष्ठ पुजारियों को लगभग 37 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है, जबकि छह माह का प्रशिक्षण लेकर आए नए 16 पुजारियों को 42 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इस वेतन अंतर को लेकर वरिष्ठ अर्चकों में नाराजगी है। उनका तर्क है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद उन्हें नए पुजारियों से कम वेतन मिलना उचित नहीं है, जबकि कार्य समान है।
अर्चक प्रशिक्षण योजना
मंदिर ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 में अर्चक प्रशिक्षण योजना की शुरुआत की थी। पहले बैच में 22 अभ्यर्थियों ने छह महीने का प्रशिक्षण पूरा किया, जिनमें से 16 को मंदिर में नियुक्त किया गया। जून 2025 में दूसरे बैच के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, लेकिन प्रशिक्षण प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हो सकी है। यदि आगे चलकर अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता होती है, तो पहले बैच के शेष चार प्रशिक्षित अर्चक ही उपलब्ध रहेंगे।
रोटेशन प्रणाली से संचालन
मौजूदा व्यवस्था के तहत 20 अर्चकों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह में 10-10 पुजारी दो पालियों में ड्यूटी कर रहे हैं। इसी रोटेशन के आधार पर रामलला, राम दरबार, परकोटा के छह मंदिर, शेषावतार मंदिर और कुबेर टीला स्थित शिव मंदिर सहित कुल 10 मंदिरों में पूजा संपन्न कराई जा रही है।
प्रशिक्षण के मानदंड
अर्चक प्रशिक्षण छह माह का निःशुल्क आवासीय कार्यक्रम है। इसमें 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के वे युवक पात्र होते हैं, जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष की गुरुकुल शिक्षा प्राप्त की हो। अयोध्या क्षेत्र के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को दो हजार रुपये मासिक मानदेय भी दिया जाता है। साथ ही रामानंदी परंपरा के अनुसार पूजा-पद्धति का सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान कराया जाता है। इस तरह, मंदिर परिसर के विस्तार के साथ पूजा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए नई नियुक्तियों और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को गति देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।