Drug addiction problems and solutions: नशे की लत, जब जागो तभी सवेरा

Edited By Updated: 28 Jan, 2023 06:43 AM

drug addiction problems and solutions

कई लोग यह भ्रम पाल लेते हैं कि तम्बाकू और सिगरेट से तनाव में कमी आती है। कई लोग यह कहते भी सुने जाते हैं कि समय बिताने और थकान दूर करने के लिए यह एक अच्छा सहारा है। सिनेमा संस्कृति और मनमौजी पन के

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Drug addiction problems and solutions: कई लोग यह भ्रम पाल लेते हैं कि तम्बाकू और सिगरेट से तनाव में कमी आती है। कई लोग यह कहते भी सुने जाते हैं कि समय बिताने और थकान दूर करने के लिए यह एक अच्छा सहारा है। सिनेमा संस्कृति और मनमौजी पन के प्रभाव में आकर भी कई लोग धूम्रपान की आदत के शिकार हो जाते हैं। विज्ञापनों का आकर्षण तथा धूम्रपान करते हुए लोगों के आकर्षक चित्र देखकर भी कुछ लोग धूम्रपान करने लगते हैं परन्तु ऐसे भोले-भाले लोगों को इसके दुष्परिणामों का तब पता लगता है जब वे जीवन में बहुत कुछ खो चुके होते हैं।
वैसे यदि धूम्रपान की लत से पीड़ित कोई व्यक्ति स्वयं को इससे मुक्त करना चाहता है तो यह बिल्कुल भी कठिन नहीं है, केवल एक संकल्प की आवश्यकता है ! तत्क्षण इसका त्याग हो सकता है। दुनिया में ऐसे कई उदाहरण देखे गए हैं कि लगातार धूम्रपान करने वालों ने सद्बुद्धि आते ही एक क्षण में इसका त्याग कर दिया।

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कुछ लोगों को भ्रम रहता है कि वर्षों तक धूम्रपान करने के बाद इसे छोड़ने से जीवन और स्वास्थ्य पर कोई न कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा परन्तु यह सही नहीं है। सच्चाई तो यह है कि ‘जब जागे तभी सवेरा’।

जिस दिन कोई व्यक्ति धूम्रपान त्यागता है, उसे उसी दिन से इसके दुष्परिणामों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है। हां ! कुछ दिनों तक उसे अटपटा लग सकता है परन्तु इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव शरीर पर नहीं होता यह तय है।

मनुष्य को भगवान ने बुद्धि, विवेक, तर्क और ज्ञान की शक्तियां किसी महत्वपूर्ण उपयोग के लिए दी हैं परन्तु जब वही शक्तियां मनुष्य के कल्याण के विपरीत काम करने लगती हैं तब मनुष्य की मूर्खता स्पष्ट हो जाती है। हमारा मस्तिष्क ईश्वरीय चेतना का युक्त रूप और बड़ा संवेदनशील है और उसकी यह दुर्दशा कितनी लज्जाजनक है, इसे प्रत्येक विचारशील व्यक्ति को सोचना तथा समझना चाहिए।
भारत के पागलखानों के सर्वेक्षण से पता चलता है कि पागलों की संख्या का 60 प्रतिशत भाग वह है, जिन्होंने तम्बाकू, सिगरेट और शराब पी-पी कर अपना दिमाग खराब कर लिया है। दुर्भाग्य है हमारे देश का कि आज वह पश्चिम की बुरी आदत को तेजी से अपनाता और बुराइयों की जड़ सींचता चला जाता है।

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