Edited By Sarita Thapa,Updated: 18 Jan, 2026 11:37 AM

अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में एक 11 मीटर ऊंचा 'हुतात्मा स्मारक' बनाने का निर्णय लिया गया है। यह स्मारक उन हज़ारों कारसेवकों और राम भक्तों को एक अमर श्रद्धांजलि होगा, जिन्होंने 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और विशेषकर 1990 के दशक के आंदोलन में अपना...
Hutatma Smarak Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में एक 11 मीटर ऊंचा 'हुतात्मा स्मारक' बनाने का निर्णय लिया गया है। यह स्मारक उन हज़ारों कारसेवकों और राम भक्तों को एक अमर श्रद्धांजलि होगा, जिन्होंने 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और विशेषकर 1990 के दशक के आंदोलन में अपना बलिदान दिया। इस स्मारक का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उस कठिन संघर्ष और बलिदान की गाथा से रूबरू कराना है, जिसके कारण आज भव्य राम मंदिर का सपना साकार हुआ है। यह स्मारक न केवल एक ढांचा होगा, बल्कि श्रद्धा का केंद्र बनेगा जहां श्रद्धालु उन शहीदों को नमन कर सकेंगे।
परिसर में विकसित की जा रही हैं दिव्य वाटिकाएं
राम मंदिर का 70 एकड़ का विशाल परिसर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और प्राकृतिक ऊर्जा का संगम भी बन रहा है। यहां रामायण कालीन वृक्षों और नक्षत्रों पर आधारित विशेष वाटिकाओं का निर्माण अंतिम चरण में है। यहां रामायण में वर्णित पांच पवित्र वृक्षों पीपल, बेल, वट, आंवला और अशोक का समूह रोपा गया है। यह क्षेत्र श्रद्धालुओं को त्रेतायुग की अनुभूति कराएगा।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक वृक्षों के संगम को हरिशंकरी कहा जाता है। इसे परिसर के अत्यंत शांत और पवित्र क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यहां 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 अलग-अलग औषधीय और धार्मिक वृक्ष लगाए गए हैं। मान्यता है कि अपने जन्म नक्षत्र वाले वृक्ष की सेवा करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
क्यों खास है यह पहल ?
ट्रस्ट का लक्ष्य है कि परिसर का 60% से अधिक हिस्सा हरा-भरा रहे, जिससे भक्तों को शांति और शुद्ध वातावरण मिले। हुतात्मा स्मारक के बनने से उन परिवारों को सम्मान मिलेगा जिन्होंने अपनों को खोया है, और यह स्थल राष्ट्र की सामूहिक चेतना का प्रतीक बनेगा।
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