Magha Gupt Navratri 2026 Today: माघ गुप्त नवरात्रि आज से आरंभ, जानें घटस्थापना मुहूर्त और मां काली पूजा विधि

Edited By Updated: 19 Jan, 2026 08:39 AM

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Magha Gupt Navratri 2026 Today: आज, 19 जनवरी 2026 (सोमवार) से माघ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाली यह नवरात्रि आध्यात्मिक और तांत्रिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गुप्त...

Magha Gupt Navratri 2026 Today: आज, 19 जनवरी 2026 (सोमवार) से माघ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाली यह नवरात्रि आध्यात्मिक और तांत्रिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है और पहले दिन मां काली की विशेष पूजा का विधान है।

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गुप्त नवरात्रि 2026 तिथि और काल
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 जनवरी 2026, रात 1:21 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 जनवरी 2026, सुबह 2:14 बजे
उदया तिथि के अनुसार: 19 जनवरी 2026 (सोमवार)
उदया तिथि को मानते हुए आज से ही गुप्त नवरात्रि का व्रत, पूजा और घटस्थापना की जाएगी।

घटस्थापना शुभ मुहूर्त 2026
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 7:14 बजे से 10:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:53 बजे तक
इन शुभ समयों में घटस्थापना और मां दुर्गा की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

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पहले दिन मां काली की पूजा का महत्व
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की उपासना की जाती है। मां काली को शक्ति, साहस, भय नाश और तांत्रिक सिद्धियों की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और साधक को आत्मबल व सुरक्षा प्राप्त होती है।

गुप्त नवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
गुप्त नवरात्रि साल में चार बार आने वाली नवरात्रियों में से एक है। अन्य नवरात्रियों की तुलना में यह अधिक सूक्ष्म, रहस्यमय और साधना प्रधान होती है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में की गई साधना शीघ्र फल प्रदान करती है और साधक को आध्यात्मिक उन्नति, सिद्धि और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

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क्यों गुप्त रखी जाती है साधना?
गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। इसी कारण इसे सार्वजनिक रूप से न करके एकांत, संयम और पूर्ण नियमों के साथ करने की परंपरा है। इस दौरान मौन, ब्रह्मचर्य, शुद्ध आहार और मानसिक एकाग्रता का विशेष महत्व होता है। तंत्र, मंत्र और यंत्र की सिद्धि गुप्त रूप से की जाती है।

गुप्त नवरात्रि 2026 पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
घी का दीपक जलाएं और कलश में जल, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते व नारियल रखें। मां दुर्गा का श्रृंगार करें और ध्यान करें।

मंत्र जाप करें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः या ॐ दुं दुर्गायै नमः (108 बार) अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती, कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करें। अंत में देवी की आरती करें और क्षमा याचना करें।

मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्र
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

व्रत और उपवास का महत्व
कई भक्त गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान संयम और श्रद्धा से की गई पूजा से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं।

माघ गुप्त नवरात्रि 2026 शक्ति उपासना का विशेष पर्व है। यह समय आत्मशुद्धि, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से साधक को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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