Maha kumbh 2025: 144 साल बाद बना समुद्र मंथन जैसा संयोग, धरती ही नहीं आसमान में भी होगा कुंभ स्नान

Edited By Updated: 15 Jan, 2025 11:04 AM

maha kumbh 2025

13 जनवरी से महाकुम्भ मेले का आगाज हो चुका है। यह एक पूर्ण कुंभ है, जो हर 12 साल में एक बार लगता है। इससे पहले 2013 में पूर्ण कुम्भ हुआ था।

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Maha kumbh 2025: 13 जनवरी से महाकुम्भ मेले का आगाज हो चुका है। यह एक पूर्ण कुंभ है, जो हर 12 साल में एक बार लगता है। इससे पहले 2013 में पूर्ण कुम्भ हुआ था। शुभ संयोग बनने की वजह से देश-विदेश से भक्त पवित्र संगम में डुबकी लगाने आ रहे हैं। महाकुम्भ के पहले शाही स्नान में लगभग 1 करोड़ के आसपास लोगों ने स्नान किया है। इस बार महाकुम्भ की खासियत यह है कि इस बार समुद्र मंथन जैसा संयोग बन रहा है, जिस वजह से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 40 करोड़ लोग संगान में स्नान करने आएंगे।

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महाकुंभ का रहस्य
हर 12 साल बाद महाकुम्भ लगता है। मान्यताओं के अनुसार देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के साल के बराबर होते हैं। कूर्म पुराण के मुताबिक चार महाकुम्भ का आयोजन धरती पर और बाकि के बचे आठ का आयोजन देवलोक में किया जाता है। इस बार 144 वर्ष बाद प्रयागराज में महाकुम्भ का आगाज हो चुका है। ऐसा में इस बार महाकुम्भ का महत्व पहले से कहीं ज्यादा है।

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आसमान में भी देवता करेंगे कुंभ स्नान
किवदिंतियों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला था तो बारह दिनों तक इसे पाने के लिए  देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध के दौरान देवताओं की जीत हुई थी। इसके बाद इसलिए देवताओं ने देवलोक में ही स्नान किया था। इस वजह से ही हर 12 साल बाद महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। कूर्म पुराण के अनुसार जिस तरह धरती पर गंगा नहीं व्यक्तियों को शुद्ध करती है, उसी तरह देव लोक में भी बहुत सी पवित्र नदियां हैं जिन में सिर्फ देवता ही स्नान करते हैं। जब भी धरती पर महाकुम्भ का आयोजन होता है, देवलोक के द्वार खुल जाते हैं और सारे देवी-देवता कुंभ स्नान करते हैं।

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