Prayagraj Magh Mela 2026 : माघ मेले में नहीं होगा अमृत स्नान, प्रशासन का बड़ा फैसला, परंपरा से छेड़छाड़ से किया इनकार

Edited By Updated: 13 Jan, 2026 08:46 AM

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Prayagraj Magh Mela 2026 : माघ मेला 2026 को लेकर संगम तट से प्रशासन की ओर से एक अहम निर्णय सामने आया है। मेला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बार माघ मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों का कहना है कि माघ मेला अपनी पारंपरिक परंपराओं...

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Prayagraj Magh Mela 2026 : माघ मेला 2026 को लेकर संगम तट से प्रशासन की ओर से एक अहम निर्णय सामने आया है। मेला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बार माघ मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों का कहना है कि माघ मेला अपनी पारंपरिक परंपराओं के अनुसार ही आयोजित किया जाएगा और इसमें किसी भी तरह की नई परंपरा को शामिल नहीं किया जाएगा। अमृत स्नान केवल कुंभ और महाकुंभ मेले से जुड़ी परंपरा है, इसलिए इसे माघ मेले में लागू करना उचित नहीं है।

दरअसल, प्रशासन को सूचना मिली थी कि कुछ साधु-संत मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान की तैयारी कर रहे हैं। इस जानकारी के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत निर्णय लिया। अधिकारियों का मानना है कि अमृत स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं, जिससे अव्यवस्था और हादसों का खतरा बढ़ सकता है। कुंभ मेले में अमृत स्नान के लिए विशेष सुरक्षा और व्यवस्थाएं होती हैं, जबकि माघ मेले में ऐसे इंतजाम नहीं किए जाते।

मेला अधिकारी आईएएस ऋषिराज ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है और इसी कारण यह फैसला लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पौष पूर्णिमा के दिन 3 जनवरी से संगम की रेती पर माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है। इसी के साथ एक माह तक चलने वाला कल्पवास भी आरंभ हो गया। सुबह से ही बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा श्रद्धालु गंगा और संगम में स्नान के लिए पहुंचने लगे।

त्रिवेणी संगम आरती सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र मिश्र के अनुसार, इस वर्ष लगभग पांच लाख श्रद्धालु कल्पवास करेंगे। कल्पवासी दिन में दो बार गंगा स्नान करते हैं, सादा और सीमित भोजन करते हैं तथा शेष समय पूजा-पाठ और साधना में व्यतीत करते हैं।

पौष पूर्णिमा के दिन कड़ाके की ठंड के कारण सुबह के समय स्नान करने वालों की संख्या कम रही, लेकिन धूप निकलने के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई। मेला प्रशासन के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक करीब नौ लाख लोगों ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई।

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