Edited By Prachi Sharma,Updated: 04 Feb, 2026 08:24 AM

Shri Banke Bihari Mandir : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मंदिर प्रबंधन समिति के फैसले को चुनौती देने वाली अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति ने किसी भी तरह से न्यायालय के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है।...
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Shri Banke Bihari Mandir : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मंदिर प्रबंधन समिति के फैसले को चुनौती देने वाली अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति ने किसी भी तरह से न्यायालय के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। न्यायालय के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं की निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए इस समिति का गठन किया था।
कोर्ट ने बताया कि दर्शन के समय में किया गया बदलाव श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें सुविधा देने के उद्देश्य से किया गया है। इससे किसी भी न्यायिक आदेश की अवहेलना नहीं होती। यह फैसला जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनाया।
नए नियमों के तहत गर्मियों में मंदिर में दर्शन सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4:15 बजे से रात 9:30 बजे तक होंगे। वहीं, सर्दियों में दर्शन का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक तय किया गया है।
इस मामले में गौरव गोस्वामी ने हाईकोर्ट में सिविल अवमानना याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि नवंबर 2022 में मथुरा की सिविल कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी, इसलिए समिति को दर्शन का समय बढ़ाने का अधिकार नहीं था।
हालांकि, कोर्ट ने माना कि समिति मंदिर परिसर के अंदर और बाहर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कोर्ट ने यह भी बताया कि प्रशासनिक विवाद और आपसी मतभेदों के कारण श्रद्धालुओं को लंबे समय से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने 8 अगस्त 2025 को एक उच्चस्तरीय मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार कर रहे हैं।
समिति की 11 सितंबर 2025 को हुई बैठक में दर्शन अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काम कर रही है और मंदिर की व्यवस्थाओं की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रही है। इसलिए उसके फैसले को अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।