श्रावण मास में भूलकर भी न करें ये काम वरना शिव जी के प्यार से रह जाएंगे वंचित

Edited By Jyoti,Updated: 15 Jul, 2022 12:53 PM

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ज्योतिष व धार्मिक शास्त्रओं के अनुसार श्रावण का मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है जिस कारण इस मास में शिव भक्त इन्हें प्रसन्न करने में जुटे रहते हैं। कहा जाता है यूं तो शिव शकर अपने भक्तों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी प्रसन्न हो जाते हैं परंतु इनके...

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ज्योतिष व धार्मिक शास्त्रओं के अनुसार श्रावण का मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है जिस कारण इस मास में शिव भक्त इन्हें प्रसन्न करने में जुटे रहते हैं। कहा जाता है यूं तो शिव शंकर अपने भक्तों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी प्रसन्न हो जाते हैं परंतु इनके बारे में ये भी कहा जाता है कि अगर शिव जी पर कोई ऐसी वस्तु चढ़ा दी जाए जो उन्हें पसंद न हो तो उन्हें बेहद क्रोध आता है। इसलिए कहा जाता है प्रत्येक व्यक्ति को इनकी पूजा में किन चीज़ों का प्रयोग होना चाहिए इस बारे में जानकारी पता होनी चाहिए। तो आइए आपको बताते हैं कि श्रावण में शिव जी की पूजा कैसे करनी चाहिए और इनकी पूजा में किन चीज़ों का इस्मेताल नहीं करना चाहिए- 
PunjabKesari, Sawan, Sawan 2022, Shiv ji, Lord Shiva, शिव जी, शंकर जी, Dharmशिव पुराण व अन्य धार्मिक शास्त्रों के अनुसार हल्दी एक ऐसी चीज़ है जिसे शिवशंभू पर अर्पित करने से वो नाराज़ हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियोचित वस्तु है। स्त्रियोचित यानी स्त्रियों संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि भगवान शिव के अलावा अन्य सभी देवी-देवताओं पर हल्दी अर्पित की जा सकती है। 

तो वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि जलाधारी पर हल्दी चढ़ाई जा सकती है। शिवलिंग दो भागों से मिलकर बना होता है। एक भाग शिवलिंग शिवजी का प्रतीक है और दूसरा भाग जलाधारी माता पार्वती का प्रतीक है। इसलिए इस पर हल्दी चढ़ाई जानी चाहिए। आपको बता दें कि हल्दी के अलावा भगवान शिव को केतकी के फूल भी अर्पित नहीं करने चाहिए।
 

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एक पौराणिक कथा के अनुसार केतकी फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, जिससे नाराज होकर भोलनाथ ने केतकी के फूल को श्राप दिया। शिव जी ने कहा कि शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शिव को केतकी के फूल अर्पित किया जाना अशुभ माना जाता है।

तो वहीं शिवलिंग पर तुलसी भी कभी अर्पित नहीं करनी चाहिए। एक कथा के मुताबिक भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था। इसलिए उन्होंने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया।
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शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जाता है लेकिन इससे अभिषेक नहीं करना चाहिए। देवताओं को चढ़ाया जाने वाले प्रसाद ग्रहण करना आवश्यक होता है। लेकिन शिवलिंग का अभिषेक जिन पदार्थों से होता है उन्हें ग्रहण नहीं किया जाता। इसलिए शिव पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त सिंदूर, विवाहित स्त्रियों का गहना माना गया है। स्त्रियां अपने पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना हेतु अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं और भगवान को भी अर्पित करती हैं। लेकिन शिव तो विनाशक हैं, यही वजह है कि सिंदूर से भगवान शिव की सेवा करना अशुभ माना जाता है।
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