Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Nov, 2026 07:08 PM

सेरामपुर के ऐतिहासिक महेश जगन्नाथ मंदिर में रविवार को लगभग 11,000 भक्त भगवद गीता के सामूहिक पाठ में शामिल होने के लिए एकत्र हुए। 'वीमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन', सेरामपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का नाम '11,000 कंठे गीता पाठ' रखा गया था।
Serampore Mahesh Jagannath Temple Gita Mahotsav : सेरामपुर के ऐतिहासिक महेश जगन्नाथ मंदिर में रविवार को लगभग 11,000 भक्त भगवद गीता के सामूहिक पाठ में शामिल होने के लिए एकत्र हुए। 'वीमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन', सेरामपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का नाम '11,000 कंठे गीता पाठ' रखा गया था। इसमें साधु-संतों, महिला भक्तों और आम लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। यह आयोजन भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा आध्यात्मिक समागम था। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे महेश जगन्नाथ मंदिर के पास स्थित लक्खी घाट से एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुई।
गंगा पूजन के बाद लगभग 500 महिलाओं ने कलश धारण किए। सामाजिक कार्यकर्ता और कार्यक्रम की आयोजक नमिता नायक के नेतृत्व में, लगभग 1,000 साधु-संतों और कार्तिक महाराज की उपस्थिति में यह शोभायात्रा मुख्य आयोजन स्थल की ओर बढ़ी। इस बड़े आयोजन में लगभग 2,000 साधु और हज़ारों श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा के बाद, सभी लोगों ने मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद मुख्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें लगभग 11,000 श्रद्धालुओं ने एक साथ भगवद गीता का पाठ किया। इसमें शामिल साधुओं और कार्तिक महाराज ने 630 साल पुराने महेश जगन्नाथ मंदिर में विशेष प्रार्थना की।
यह मंदिर इस क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की पूजा के ऐतिहासिक केंद्रों में से एक है। इस आयोजन में सामुदायिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महिलाओं की भागीदारी पर भी ज़ोर दिया गया। तीन साल पहले नमिता नायक द्वारा स्थापित 'वीमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन' (महिला सशक्तिकरण फाउंडेशन) ने खादी, कुटीर उद्योगों और हस्तशिल्प के ज़रिए लगभग 6,000 महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए हैं। अपने 'नारी उद्योग' अभियान के माध्यम से, यह फाउंडेशन महिलाओं को हाथ से बनी चीज़ें बनाने और उन्हें बाज़ार में बेचने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे वे घर बैठे अपनी आजीविका कमा सकती हैं।
'वीमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन' की संस्थापक और चेयरपर्सन नमिता नायक ने कहा, "हमारा उद्देश्य भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और महिला सशक्तिकरण को एक मंच पर लाना है। इस आध्यात्मिक पहल के साथ-साथ, हम समाज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना चाहते हैं और उनके लिए आजीविका के स्थायी अवसर पैदा करना चाहते हैं।" यह कार्यक्रम सेरामपुर में एक बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में सामने आया, जो दिखाता है कि किस तरह समुदाय के नेतृत्व वाली पहल धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सशक्तिकरण को एक साथ ला सकती है।
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