सोमवती अमावस्या पर शाम को दीपदान क्यों माना जाता है शुभ? जानिए धार्मिक रहस्य

Edited By Updated: 15 Jun, 2026 04:07 PM

somvati amavasya 2026

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत खास महत्व है। लेकिन जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार के दिन अमावस्या के पड़ने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

Somvati Amavasya 2026 : सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत खास महत्व है। लेकिन जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार के दिन अमावस्या के पड़ने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। सोमवार का दिन देवों के देव महादेव और चंद्रमा की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से सभी पापों सा नाश होता है और जीवन में चल रही सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। इस दिन शाम के समय दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या के दिन दीपदान के महत्व के बारे में-

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सोमवती अमावस्या पर शाम के समय दीपदान क्यों है जरूरी?

पितरों की कृपा पाने के लिए किया जाता है दीपदान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि हमारे पितरों को समर्पित होती है। इस दिन पितर लोक से हमारे पूर्वज पृथ्वी लोक पर अपने परिजनों से मिलने आते हैं। शाम के समय जब सूर्य अस्त हो जाता है, तो उनके वापस लौटने का समय होता है। ऐसे में घर के मुख्य द्वार या दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से पितरों का मार्ग रोशन होता है। इससे प्रसन्न होकर वे अपने परिवार को सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

मां लक्ष्मी का होता है घर में प्रवेश
अमावस्या की शाम को प्रदोष काल कहा जाता है। यह समय धन की देवी माता लक्ष्मी के आगमन का होता है। मान्यता है कि जहाँ अंधकार होता है, वहां अलक्ष्मी का वास होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या की शाम को घर के कोने-कोने को दीपक की रोशनी से चमकाना चाहिए ताकि मां लक्ष्मी का स्थायी वास आपके घर में हो सके और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाए।

ग्रहों के दोष और नकारात्मकता से मुक्ति
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या पर दीपदान करने से कुंडली का 'चंद्र दोष' और 'शनि दोष' शांत होता है। दीपक की लौ घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करके सकारात्मकता का संचार करती है।

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शाम को कहां-कहां करना चाहिए दीपदान?

घर की दक्षिण दिशा 
इस दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। यहां सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं।

मुख्य द्वार 
घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ घी या तिल के तेल का दीपक रखें ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत हो सके।

पीपल के पेड़ के नीचे 
अमावस्या पर पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है। शाम को पीपल के पास दीपक जलाने से हर तरह के संकट दूर होते हैं।

तुलसी के पौधे के पास 
तुलसी जी के पास दीपक जलाने से घर में शांति और सौभाग्य का आगमन होता है।

शिव मंदिर में 
चूंकि यह सोमवती अमावस्या है, इसलिए पास के किसी शिव मंदिर में जाकर घी का दीपक जलाने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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