Edited By Jyoti,Updated: 28 Aug, 2022 10:37 AM

हमारे देश में अनेकों शिव मंदिर हैं जिनकी ख्याति न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। आज हम एक बार फिर आपको ऐसे ही एक शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी एक
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हमारे देश में अनेकों शिव मंदिर हैं जिनकी ख्याति न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। आज हम एक बार फिर आपको ऐसे ही एक शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी एक विशेष खासियत के चलते देश-विदेश में प्रसिद्धि हासिल किए हुए हैं। दरअसल हम बात करने जा रहे हैं शिव के विरुपाक्ष मंदिर की।
बता दें देवों के देव महादेव का ये प्राचीन मंदिर मध्याप्रदेश के रतलाम जिले के बिलपांक गांव में स्थित है। जिसकी एक सबसे बड़ी खासियत है इस मंदिर का नाम। इस मंदिर को भूल भलैयां वाला शिव मंदिर कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी खास जानकारी-

विरूपाक्ष नामक ये महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना मध्ययुग से पहले, परमार राजाओं ने की थी और भगवान भोलेनाथ के 11 रुद्र अवतारों में से पांचवें रुद्र अवतार के नाम पर इस मंदिर का नाम विरूपाक्ष महादेव मंदिर रखा गया।

मंदिर के चारों कोनों में चार मंडप बनाए गए हैं जिसमें भगवान गणेश, मां पार्वती और भगवान सूर्य की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है। मंदिर को भूल भुलैयां वाला शिव मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लगे खंभों की एक बार में सही गिनती करना किसी के बस की बात नहीं है। सभी 64 खंभों पर की गई नक्काशी देखने योग्य है।

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इस प्राचीन मंदिर के अंदर 34 खंभों का एक मंडप है और सभी चारों कोनों पर खंभों की गिनती 14-14 बनती है जबकि 8 खंभे अंदर गर्भगृह में हैं। ऐसे में एक बार में इन खंभों की सही गिनती करना मुश्किल है। मंदिर में 5.20 वर्गमीटर के गर्भगृह में पीतल की चादर से आच्छादित 4.14 मीटर परिधि वाली जलधारी व 90 सैंटीमीटर ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। 64 स्तम्भ वाले सभागृह में एक स्तम्भ मौर्यकालीन भी है।

यहां 75 वर्षों से हर शिवरात्रि पर महारुद्र यज्ञ होता है जिसमें खीर का प्रसाद ग्रहण करने दूर-दूर से बड़ी संख्या में नि:संतान दम्पति आते हैं। मंदिर के सभा मंडल में नृत्य करती हुई अप्सराएं वाद्य यंत्रों के साथ नजर आती हैं।

मुख्य मंदिर के आसपास मौजूद सहायक मंदिरों में भी कई सुंदर तथा प्राचीन प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। जैसे कि हनुमान जी की ध्यानस्थ प्रतिमा, जलाधारी व शिव पिंड से लेकर विष्णु भगवान की गरुड़ पर विराजमान प्रतिमा।
