शास्त्रों से जानें, विवाह में अग्नि के समक्ष क्यों लिए जाते हैं सात फेरे

Edited By Updated: 06 Dec, 2025 03:52 PM

why do the bride and groom go round the fire 7 times in the marriage rituals

यज्ञाग्नि के चारों ओर फिरना ही परिक्रमाएं/फेरे के नाम से जानी जाती हैं। इसे भंवर फिरना भी कहते हैं। यूं तो शास्त्रों के अनुसार यज्ञाग्नि की चार परिक्रमाएं करने का विधान है, लेकिन लोकाचार से सात परिक्रमाएं

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Why do the bride and groom go round the fire 7 times in the marriage rituals: यज्ञाग्नि के चारों ओर फिरना ही परिक्रमाएं/फेरे के नाम से जानी जाती हैं। इसे भंवर फिरना भी कहते हैं। यूं तो शास्त्रों के अनुसार यज्ञाग्नि की चार परिक्रमाएं करने का विधान है, लेकिन लोकाचार से सात परिक्रमाएं करने की प्रथा चल पड़ी है। ये सात फेरे विवाह संस्कार के धार्मिक आधार होते हैं। इन्हें अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। विवाह के अवसर पर यज्ञाग्नि की परिक्रमा करते हुए वर-वधू मन में यह धारणा करते हैं कि अग्निदेव के सामने सबकी उपस्थिति में हम सात परिक्रमा करते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम दोनों एक महान पवित्र धर्म बंधन में बंधते हैं। इस संकल्प को निभाने और चरितार्थ करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।

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अग्नि के सामने यह रस्म इसलिए पूरी की जाती है क्योंकि एक ओर अग्नि जीवन का आधार है तो दूसरी ओर जीवन में गतिशीलता और कार्य की क्षमता तथा शरीर को पुष्ट करने की क्षमता सभी कुछ अग्नि के द्वारा ही आती है। आध्यात्मिक संदर्भों में अग्नि पृथ्वी पर सूर्य की प्रतिनिधि है और सूर्य जगत की आत्मा तथा विष्णु का रूप हैं।

अत: अग्नि के समक्ष फेरे लेने का अर्थ है, परमात्मा के समक्ष फेरे लेना। अग्नि हमारे सभी पापों को जलाकर नष्ट भी कर देती है, अत: जीवन में पूरी पवित्रता के साथ एक अति महत्वपूर्ण कार्य का आरंभ अग्नि के सामने ही करना सब प्रकार से उचित है।
वर-वधू परिक्रमा बाएं से दाएं की ओर चल कर प्रारंभ करते हैं। पहली चार परिक्रमाओं में वधू आगे रहती है और वर पीछे तथा शेष तीन परिक्रमाओं में वर आगे और वधू पीछे चलती है। हर परिक्रमा के दौरान पंडित द्वारा विवाह संबंधी मंत्रोच्चारण किया जाता है। परिक्रमा पूर्ण होने पर वर-वधू गायत्री मंत्रानुसार यज्ञ में हर बार एक-एक आहुति डालते हैं।
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Forms of Marriage in Hindu Religion विवाह कितने प्रकार के होते हैं?
शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं- ब्राह्म, देव, आर्ण, प्राजापत्य, असुर, गंधर्व, राक्षस और पैशाच। इसमें प्रथम चार प्रकार के विवाह श्रेष्ठ कहे गए हैं। अंतिम चार निकृष्ट कहे गए हैं।

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