20 साल पुराने सॉफ्टवेयर से यूक्रेन ने हिला दी रूस की साख, जानें क्या है ऑपरेशन ‘स्पाइडर वेब’

Edited By Updated: 05 Jun, 2025 11:48 AM

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यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई है। इस बार यूक्रेन ने एक ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया है जिसने सिर्फ रूस को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस ऑपरेशन का नाम है ‘स्पाइडर वेब’, और इसकी सबसे बड़ी खासियत है...

नेशनल डेस्क: यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई है। इस बार यूक्रेन ने एक ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया है जिसने सिर्फ रूस को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस ऑपरेशन का नाम है ‘स्पाइडर वेब’, और इसकी सबसे बड़ी खासियत है – इसमें 20 साल पुराने ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रूस के गहरे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

क्या है ऑपरेशन ‘स्पाइडर वेब’?

स्पाइडर वेब यूक्रेन की एक गुप्त सैन्य रणनीति का नाम है, जिसमें पुराने, सस्ते और खुले स्रोत (ओपन-सोर्स) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए रूस के तीन रणनीतिक एयरबेस पर जबरदस्त हमला किया गया। यह हमला पारंपरिक सैन्य तकनीक से नहीं बल्कि ऑटोनॉमस ड्रोन टेक्नोलॉजी के जरिए किया गया था, जिसे ‘ArduPilot’ नामक सॉफ्टवेयर कंट्रोल कर रहा था।

किसे बनाया गया निशाना?

यूक्रेन ने रूस के तीन महत्वपूर्ण एयरबेस —

पर इस ऑपरेशन के तहत हमला किया। ये तीनों ठिकाने रूसी लॉन्ग-रेंज बमवर्षक विमानों और क्रूज मिसाइल कैरियर्स के प्रमुख अड्डे हैं।

हमले में कैसे हुआ ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल?

ऑपरेशन ‘स्पाइडर वेब’ में यूक्रेन ने कुल 117 स्वचालित ड्रोन का इस्तेमाल किया। ये सभी ड्रोन पहले से ही रूसी सीमा के भीतर गुप्त रूप से तैनात किए गए थे। एक तय समय पर इन सभी ड्रोन को स्वचालित तरीके से ट्रिगर करके एक साथ लॉन्च किया गया, जिससे रूसी सुरक्षा व्यवस्था को संभलने का मौका नहीं मिला। ये ड्रोन पूरी तरह ऑटोनॉमस यानी स्वतंत्र रूप से काम करने वाले थे। इन्हें चलाने के लिए किसी इंसानी कंट्रोल या रियल टाइम सैटेलाइट सिस्टम (जैसे Starlink) की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय यूक्रेन ने स्थानीय मोबाइल नेटवर्क और Raspberry Pi जैसे कम लागत वाले डिवाइसेज का इस्तेमाल किया। ड्रोन कंट्रोल के लिए जिस सॉफ्टवेयर का उपयोग हुआ, वह था ‘ArduPilot’ एक ओपन-सोर्स ऑटोपायलट टेक्नोलॉजी जो करीब 20 साल पुरानी है। यह सस्ता और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध सॉफ्टवेयर अब युद्ध के मैदान में अत्याधुनिक हथियारों की बराबरी करता दिखा। इस ऑपरेशन की एक खास बात यह भी थी कि हमला तीन अलग-अलग टाइम जोन में एक साथ अंजाम दिया गया, ताकि रूसी रडार सिस्टम भ्रमित हो जाएं और जवाब देने में देर हो।

रूस को हुआ भारी नुकसान

इस हमले से रूस को गहरा सैन्य झटका लगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन द्वारा की गई इस तकनीकी मार से करीब 34% रूसी स्ट्रैटेजिक बमवर्षक विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो गए या फिर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। ये बमवर्षक रूस की दीर्घ दूरी तक हमला करने वाली सैन्य रणनीति का केन्द्र बिंदु माने जाते हैं। इसलिए यह हमला सिर्फ एक सैन्य नुकसान नहीं, बल्कि रूस की रणनीतिक क्षमता पर सीधा प्रहार था।

एक साल से भी लंबी चली ऑपरेशन की तैयारी

इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे यूक्रेनी सेना, इंजीनियरों और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की एक साल से भी ज्यादा की मेहनत थी। मौसम, नेटवर्क की स्थिति, ड्रोन की रेंज, लॉन्च टाइमिंग इन सभी पहलुओं पर महीनों तक परीक्षण किया गया। यूक्रेन ने यह भी सुनिश्चित किया कि यह पूरा सिस्टम किसी बड़े और आसानी से ट्रेस किए जाने वाले नेटवर्क पर निर्भर न रहे। स्थानीय मोबाइल नेटवर्क और सस्ते लेकिन कुशल हार्डवेयर का इस्तेमाल कर गुप्तता और सुरक्षा बनाए रखी गई।

 

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