Edited By Parveen Kumar,Updated: 29 Mar, 2026 10:23 PM

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने निवेशकों और अर्थशास्त्रियों को चौंका दिया है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा तुर्की अब दुनिया का सबसे बड़ा सोना विक्रेता बनकर उभरा है। महज 14 दिनों के भीतर तुर्की के केंद्रीय...
नेशनल डेस्क : वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने निवेशकों और अर्थशास्त्रियों को चौंका दिया है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा तुर्की अब दुनिया का सबसे बड़ा सोना विक्रेता बनकर उभरा है। महज 14 दिनों के भीतर तुर्की के केंद्रीय बैंक ने करीब 58 टन सोना बेच दिया, जिसकी कुल कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक आंकी गई है। इस भारी बिक्री का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर देखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में 6 टन और 20 मार्च तक के सप्ताह में 52.4 टन सोना बेचा गया। इस बड़ी बिकवाली के बाद तुर्की का कुल स्वर्ण भंडार घटकर लगभग 513 टन रह गया है, जो पिछले सात वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। बताया गया है कि बेचे गए सोने के आधे से अधिक हिस्से का इस्तेमाल विदेशी स्वैप डील के जरिए अमेरिकी डॉलर उधार लेने में किया गया, जबकि शेष सोना खुले बाजार में बेचा गया। यह बिक्री इतनी बड़ी थी कि इसने गोल्ड-समर्थित ईटीएफ से हुई 43 टन की निकासी को भी पीछे छोड़ दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम के पीछे तुर्की की कमजोर होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई मुख्य कारण हैं। तुर्की की मुद्रा लीरा पर भारी दबाव है, वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आयात महंगा हो गया है और डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मुद्रा को स्थिर रखने और बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक को अपने स्वर्ण भंडार का सहारा लेना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटकर करीब 175 अरब डॉलर रह गया है, जो हाल के समय का निचला स्तर है।
इस बड़े कदम का असर वैश्विक बुलियन बाजार पर भी पड़ा है। बाजार में सोने की आपूर्ति बढ़ने के चलते कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। लंदन के हाजिर बाजार में सोने के दाम एक समय 3.1 प्रतिशत तक गिर गए और अंत में 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव जारी रहता है, तो तुर्की आगे भी इसी तरह के कदम उठा सकता है। ऐसे में आम निवेशकों और खरीदारों के लिए यह जरूरी है कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि इन्हीं वैश्विक घटनाओं का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ता है।