Edited By Tanuja,Updated: 10 Jan, 2026 05:01 PM

विदेश नीति विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव का कहना है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को “रिमोट कंट्रोल कॉलोनी” में बदलने की तैयारी में है। अमेरिका वेनेजुएला का तेल खुद बेचेगा, जबकि भारत जैसे देश भारी कच्चा तेल खरीदने के इच्छुक हो सकते हैं।
International Desk: विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका की योजना वेनेजुएला को एक तरह से “रिमोट कंट्रोल कॉलोनी” बनाने की है, जहां सत्ता भले वेनेजुएला सरकार के पास दिखे, लेकिन असली नियंत्रण अमेरिका के हाथ में होगा। सचदेव ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल को वैश्विक बाजार में खुद बेचना चाहता है और इस पूरे सिस्टम की निगरानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जैसे नेता करेंगे, जो एक तरह से “वायसरॉय” की भूमिका निभाएंगे। अमेरिकी और यूरोपीय तेल कंपनियों को वहां निवेश के लिए दबाव डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर कीमतें अनुकूल रहीं तो भारत के लिए वेनेजुएला का तेल एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है। खासतौर पर रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी जैसी भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल (Heavy Crude) को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, नाफ्था और हीटिंग ऑयल जैसे कई उत्पाद निकाले जा सकते हैं। सचदेव के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ऊर्जा सचिव और आंतरिक मामलों के सचिव के जरिए तेल कंपनियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वेनेजुएला में निवेश सुरक्षित और मुनाफे वाला होगा। हालांकि कई कंपनियां अभी हिचकिचा रही हैं, क्योंकि वहां तेल क्षेत्र को दोबारा खड़ा करने के लिए 60 से 200 अरब डॉलर तक के निवेश की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि तेल उद्योग लोकतांत्रिक या भू-राजनीतिक मूल्यों से नहीं, बल्कि मुनाफे और शेयरधारकों के लाभ से चलता है। यही वजह है कि ट्रंप वेनेजुएला को स्थिरता और भारी मुनाफे का सपना दिखाकर निवेश खींचने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश को लेकर कहा कि “यहां से बहुत पैसा बनेगा।” विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी रणनीति वेनेजुएला के संसाधनों पर लंबे समय तक अमेरिकी नियंत्रण की ओर इशारा करती है।