रूस-यूक्रेन युद्ध से वेनेजुएला तक: UN महासचिव गुतारेस का कड़ा संदेश, “संयुक्त राष्ट्र चार्टर कोई ‘मेन्यू’ नहीं”

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 08:04 PM

antonio guterres un charter not a la carte menu

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खुले उल्लंघन पर तीखी चेतावनी देते हुए कहा कि UN चार्टर कोई मनपसंद नियम चुनने का मेन्यू नहीं है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और वेनेजुएला मामले का जिक्र कर बहुपक्षवाद बचाने का आह्वान...

International Desk: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कुछ देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून का खुलेआम उल्लंघन किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर कोई ऐसा ‘मेन्यू' (व्यंजन सूची) नहीं है, जिसमें से अपनी पसंद का नियम चुना जा सके। गुतारेस ने कहा कि जब नेता अपनी सुविधा के हिसाब से यह चुनते हैं कि किस नियम को मानना है और किसे नहीं तो वे दुनिया की व्यवस्था को कमजोर करते हैं और एक बेहद खतरनाक मिसाल कायम करते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में प्रवेश कर रहे गुतारेस ने बृहस्पतिवार को 193 सदस्यीय महासभा में कहा कि वह 2026 के हर दिन को सार्थक बनाएंगे और वह बेहतर दुनिया के लिए काम करने, लड़ने एवं प्रयास जारी रखने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध तथा दृढ़संकल्पित हैं।

 

वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण तथा अन्य भू-राजनीतिक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में गुतारेस ने कहा कि दुनिया संघर्ष, असमानता और अनिश्चितता से भरी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसी दुनिया जो आत्मघाती भू-राजनीतिक विभाजनों... अंतरराष्ट्रीय कानून के धड़ल्ले से उल्लंघनों... और विकास एवं मानवीय सहायता में व्यापक कटौती से ग्रस्त है। ये ताकतें और अन्य कारक वैश्विक सहयोग की नींव को हिला रहे हैं और बहुपक्षवाद के लचीलेपन की क्षमता की परीक्षा ले रहे हैं।'' संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वर्ष की अपनी प्राथमिकताओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अपने पारंपरिक संबोधन में कहा, ‘‘यही हमारे दौर का विरोधाभास है: जिस समय हमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसी समय हम इसका उपयोग करने और इसमें निवेश करने के प्रति सबसे कम इच्छुक नजर आते हैं।

 

कुछ लोग अंतरराष्ट्रीय सहयोग को खत्म करने के कगार पर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हम हार नहीं मानेंगे।'' संयुक्त राष्ट्र महासचिव के तौर पर गुतारेस का दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को समाप्त होगा। गुतारेस ने अमेरिका एवं वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव और वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़े जाने को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि ये घटनाक्रम एक ‘‘खतरनाक मिसाल'' हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का सम्मान नहीं किया गया। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते रहे गुतारेस ने महासभा से कहा कि यूक्रेन में लड़ाई रोकने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप न्यायपूर्ण एवं स्थायी शांति हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए।

 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन नहीं करने को लेकर देशों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि चार्टर एक ‘‘समझौता'' है जो ‘‘हम सभी को बांधता है।'' गुतारेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर ‘‘अ ला कार्टे मेन्यू'' (व्यंजनों की ऐसी सूची, जिसमें में मनपसंद व्यंजनों को चुना जाता है) नहीं, बल्कि ‘प्री फिक्स' (ऐसा मेन्यू जिसमें निर्धारित व्यंजन मिलते हैं) है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पूरी तरह और ईमानदारी से पालन करना होगा। कोई किंतु-परंतु नहीं।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह चार्टर अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव है-शांति, सतत विकास और मानवाधिकारों की आधारशिला है।'' गुतारेस ने कहा, ‘‘जब नेता अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाते हैं, जब वे अपनी मर्जी से नियमों का पालन करते हैं, तो वे न केवल वैश्विक व्यवस्था को कमजोर कर रहे होते हैं, बल्कि एक खतरनाक मिसाल भी कायम कर रहे होते हैं।''

 

गुतारेस ने चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का क्षरण दबे-छिपे नहीं हो रहा, बल्कि ‘‘दुनिया की आंखों के सामने, हमारी स्क्रीन पर हो रहा हैं।'' उन्होंने कहा कि हर जगह लोग दंडमुक्ति के परिणाम देख रहे हैं- ‘‘बल का अवैध उपयोग और इसका इस्तेमाल करने की धमकी, आम नागरिकों, मानवीय सहायता कर्मियों एवं संयुक्त राष्ट्र कर्मियों पर हमले, सरकारों में असंवैधानिक बदलाव, मानवाधिकारों का दमन, असहमति की आवाज दबाना, संसाधनों की लूट।'' गुतारेस ने कहा, ‘‘जब मुट्ठीभर लोग वैश्विक विमर्श को मोड़ सकते हैं, चुनावों को प्रभावित कर सकते हैं या सार्वजनिक बहस की शर्तें तय कर सकते हैं तो हम केवल असमानता का सामना नहीं कर रहे होते, हम संस्थानों और हमारे साझा मूल्यों के क्षरण का सामना कर रहे होते हैं।''  

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