Edited By Tanuja,Updated: 21 Jan, 2026 07:15 PM

भारत की ग्लोबल साउथ साझेदारी अब उसकी विदेश नीति का अहम स्तंभ बन चुकी है। कूटनीति, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए भारत विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठा रहा है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है।
International Desk: भारत की ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के साथ साझेदारी अब उसकी विदेश नीति का एक मुख्य और स्थायी स्तंभ बन चुकी है। साझा इतिहास, समान संघर्षों और आत्मनिर्भर विकास की आकांक्षाओं के आधार पर भारत कूटनीति, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से ग्लोबल साउथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिका स्थित साउथ एशियन हेराल्ड में प्रकाशित लेख में वरिष्ठ राजनयिक राजदूत अशोक सज्जनहार ने लिखा है कि भारत की भूमिका समय के साथ बदली है। पहले भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का नेतृत्व करता था, जबकि अब वह साउथ-साउथ सहयोग में एक प्रभावशाली वैश्विक शक्ति बन चुका है।
भारत की यह साझेदारी तब और मजबूत हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में G20 अध्यक्षता संभालते ही पहला ‘वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट’ आयोजित किया। इसके बाद दूसरा समिट 2023 में वर्चुअल माध्यम से और तीसरा समिट 2024 में आयोजित हुआ। इन सम्मेलनों के जरिए भारत ने न सिर्फ विकासशील देशों की समस्याएं, प्राथमिकताएं और आकांक्षाएं दुनिया के सामने रखीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके मुद्दों को भी मजबूती से उठाया। साथ ही, भारत ग्लोबल साउथ के देशों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। लेख में कहा गया है कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, लोकतांत्रिक व्यवस्था और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति उसे न्यायपूर्ण वैश्विक शासन प्रणाली को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाती है।
भारत की विकास सहायता योजनाएं भी उसकी भूमिका को दर्शाती हैं। आईटीईसी (ITEC) कार्यक्रम के तहत भारत अब तक 160 से अधिक देशों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण में मदद कर चुका है। राजदूत सज्जनहार ने बताया कि भारत की G20 अध्यक्षता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाना रहा। यह मुद्दा वर्षों से लंबित था, जिसे भारत ने ग्लोबल साउथ के हितों को ध्यान में रखते हुए सफलतापूर्वक सुलझाया।
भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति ने भी उसकी वैश्विक भूमिका को मजबूत किया है। 2014 में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जबकि 2025 में वह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2035 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हो जाएगी। लेख के अनुसार, भारत आज न केवल एक नेता बल्कि ग्लोबल साउथ का भरोसेमंद साझेदार बनकर उभरा है और 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में विकासशील देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ रहा है।