इजरायल का सख्त ऐलानः ईरान से सीजफायर का सम्मान, लेकिन नहीं बचेगा लेबनान !

Edited By Updated: 08 Apr, 2026 02:44 PM

israel says fighting ground operations continue against hezbollah

इजरायल ने ईरान के साथ 2 हफ्ते के युद्धविराम का पालन शुरू कर दिया है, लेकिन लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी हैं। 5 हफ्तों की जंग में 1400 से ज्यादा लोग मारे गए। हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष टलने के बावजूद खतरा...

International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल ने बड़ा ऐलान किया है कि वह ईरान के साथ हुए 2 हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) का पालन कर रहा है। इजरायली सेना ने साफ कहा कि उसने ईरान के खिलाफ अपने हमले रोक दिए हैं और फिलहाल समझौते के नियमों का पालन किया जा रहा है। सेना के अनुसार, यह फैसला राजनीतिक निर्देशों के बाद लिया गया है। साथ ही इजरायल ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और अगर ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन किया, तो तुरंत सैन्य कार्रवाई की जाएगी।


सीजफायर सिर्फ ईरान तक सीमित
यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल के बाद लागू हुआ। ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम दिया था कि वह 2 हफ्तों के लिए हमले रोकने और Strait of Hormuz को खोलने पर सहमत हो, वरना बड़े हमले किए जाएंगे। हालांकि, इजरायल ने साफ कर दिया है कि यह सीजफायर सिर्फ ईरान तक सीमित है। लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई जारी है।इजरायली सेना ने कहा कि वह Hezbollah के खिलाफ जमीनी और हवाई ऑपरेशन लगातार चला रही है। इसका मतलब है कि एक तरफ ईरान के साथ शांति की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लेबनान में संघर्ष जारी है।

 

कैसे शुरू हुआ यह युद्ध?
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल, जॉर्डन, इराक और खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया।

 

भारी तबाही और मौतें
इस 5 हफ्ते की जंग में 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें कई बड़े सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं।यह संघर्ष इतना गंभीर हो गया था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा, खासकर तेल बाजार पर। Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया का प्रमुख तेल सप्लाई मार्ग है। ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित कर दी थी और अब सीजफायर की शर्तों में इसे दोबारा खोलना शामिल है। 
 
 

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