Edited By Pardeep,Updated: 13 Feb, 2026 11:25 PM

भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिका की अदालत में खालिस्तानी समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप स्वीकार कर लिया है। यह मामला न्यूयॉर्क सिटी से जुड़ा है, जहां पन्नू की हत्या की कथित साजिश रची गई थी, लेकिन वह नाकाम रही।
इंटरनेशनल डेस्कः भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिका की अदालत में खालिस्तानी समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप स्वीकार कर लिया है। यह मामला न्यूयॉर्क सिटी से जुड़ा है, जहां पन्नू की हत्या की कथित साजिश रची गई थी, लेकिन वह नाकाम रही।
मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में कबूला जुर्म
निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित फेडरल कोर्ट में तीन आपराधिक आरोपों में अपना गुनाह कबूल किया। उन्होंने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने पेश होकर आरोप स्वीकार किए। मैनहट्टन में यूएस अटॉर्नी ऑफिस के प्रवक्ता के अनुसार, 54 वर्षीय निखिल गुप्ता ने सुपारी लेकर हत्या की साजिश (मर्डर फॉर हायर) और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों को स्वीकार किया है। इन आरोपों में अधिकतम 40 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। फिलहाल निखिल गुप्ता के वकील की ओर से इस मामले में कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
2024 से अमेरिका की जेल में बंद
निखिल गुप्ता को जून 2024 में चेक रिपब्लिक से अमेरिका प्रत्यर्पित (एक्सट्रैडिशन) किया गया था। इससे पहले उन्हें चेक रिपब्लिक में गिरफ्तार किया गया था। अमेरिका लाए जाने के बाद से वे ब्रुकलिन की जेल में बंद हैं। प्रत्यर्पण के तुरंत बाद निखिल गुप्ता ने खुद को बेगुनाह बताया था और कहा था कि उन पर लगे आरोप गलत और झूठे हैं। लेकिन अब उन्होंने अदालत में औपचारिक रूप से अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
क्या है पूरा आरोप?
अमेरिकी अभियोजकों (प्रॉसिक्यूटर्स) का आरोप है कि निखिल गुप्ता ने भारत के एक सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची थी। गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में रहते हैं और उनके पास अमेरिकी तथा कनाडाई नागरिकता है। वे प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख हैं। भारत सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है और पन्नू को भारत में आतंकवादी घोषित किया गया है।
आगे क्या हो सकता है?
अब अदालत सजा तय करेगी। चूंकि निखिल गुप्ता ने आरोप कबूल कर लिए हैं, इसलिए उन्हें अधिकतम 40 साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि अंतिम सजा अदालत द्वारा सभी तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय की जाएगी। यह मामला भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय साजिश और दो देशों के नागरिक शामिल हैं।