Edited By Tanuja,Updated: 26 Mar, 2026 06:19 PM

Russia ने अपने मालवाहक जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा देने का फैसला किया है, क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा जहाजों को रोकने की घटनाएं बढ़ रही हैं। बाल्टिक और काला सागर क्षेत्रों में तनाव बढ़ा है, जिससे समुद्री टकराव और वैश्विक व्यापार पर खतरा मंडरा रहा है।
International Desk: रूस (Russia) ने अपने मालवाहक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। रूस ने घोषणा की है कि वह अपने जहाजों को अब नौसेना की सुरक्षा प्रदान करेगा, क्योंकि हाल के दिनों में पश्चिमी देशों की नौसेनाओं द्वारा रूसी जहाजों को रोकने और जांच करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। यह निर्णय रूस के मैरीटाइम बोर्ड की बैठक में लिया गया, जहां अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर रूसी जहाजों की जब्ती या रोकथाम से निपटने के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार किए गए। ये नियम मुख्य रूप से Black Sea, Sea of Azov और Baltic Sea क्षेत्रों में लागू होंगे।
रूस के सुरक्षा परिषद से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी Nikolai Patrushev ने कहा कि रूस के साथ काम करने वाले जहाज मालिकों को नौसेना के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जहाजों की निगरानी और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यूरोपीय देश रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इस फ्लीट का इस्तेमाल रूस द्वारा भारत और चीन जैसे देशों तक तेल और गैस पहुंचाने के लिए किया जाता है, खासकर तब जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं।
दूसरी ओर, कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटिश सेना को उन रूसी जहाजों को रोकने और तलाशी लेने की अनुमति दी है, जिन्हें प्रतिबंधों का उल्लंघन कर तेल निर्यात करने वाला माना जाता है। इस फैसले से समुद्र में रूस और पश्चिमी देशों के बीच टकराव का खतरा और बढ़ गया है। हाल ही में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं तब और बढ़ गईं, जब Bosphorus Strait के पास एक तेल टैंकर ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। यह जहाज रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह से Istanbul की ओर जा रहा था।