मौत के बाद फिर जिंदा हुई महिला! बताया – उस पार की दुनिया में क्या देखा

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 10:42 PM

the woman came back to life after death

यह कहानी है एरिका टेट की, जो एक खतरनाक हादसे के बाद मौत के बेहद करीब पहुंच गई थीं। लेकिन चमत्कारिक रूप से बचने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, वह आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है।

नेशनल डेस्कः यह कहानी है एरिका टेट की, जो एक खतरनाक हादसे के बाद मौत के बेहद करीब पहुंच गई थीं। लेकिन चमत्कारिक रूप से बचने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, वह आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है।

2015 का वो दिन, जब मौत सामने खड़ी थी

साल 2015, अमेरिका के न्यू जर्सी में रहने वाली 22 साल की एरिका टेट अकेले हाइकिंग पर निकली थीं। वह पैलिसेड्स क्लिफ्स नाम की खतरनाक पहाड़ियों पर बिना किसी सेफ्टी इक्विपमेंट के चढ़ रही थीं। तभी अचानक उनका पैर फिसला और वे करीब 60 फीट नीचे चट्टानों पर गिर पड़ीं।

गिरने से उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

सांस लेना तक मुश्किल हो गया था। दर्द असहनीय था।

7 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एरिका करीब 7 घंटे तक दर्द में तड़पती रहीं। उन्होंने मदद के लिए फोन किया, लेकिन सदमे और दर्द की वजह से अपनी सही लोकेशन नहीं बता पाईं। जंगल और पहाड़ियों के बीच वह अकेली पड़ी रहीं। यही वो लंबा इंतजार था, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी।

जब अचानक दर्द खत्म हो गया

एरिका बताती हैं कि एक पल ऐसा आया, जब अचानक सारा दर्द खत्म हो गया। उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी चेतना शरीर से अलग होकर ऊपर उठ रही हो। चारों ओर गहरी शांति थी— न डर, न पीड़ा और न बेचैनी। बस एक अजीब सा सुकून।


सफेद रोशनी और अद्भुत शांति का अनुभव

एरिका का कहना है कि उन्होंने एक तेज और चमकदार सफेद रोशनी देखी। उनके मुताबिक, यह कोई साधारण रोशनी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी शक्ति थी जिसे वह ईश्वर या यूनिवर्सल कॉन्शसनेस कहती हैं। उसी पल उन्हें यह एहसास हुआ कि इंसान सिर्फ शरीर नहीं है, बल्कि एक ऐसी ऊर्जा है जो कभी खत्म नहीं होती।

आंखों के सामने पूरी जिंदगी चलने लगी

मौत के बेहद करीब पहुंचकर एरिका ने अपनी पूरी जिंदगी को एक फिल्म की तरह चलते देखा।

  • कोई जज नहीं था

  • कोई सजा नहीं

  • कोई डर नहीं

बस खुद के कर्मों से सामना। उन्होंने देखा कि उनके कुछ फैसलों ने दूसरों को कैसे दर्द पहुंचाया और कहीं न कहीं उन्हें खुद भी नुकसान हुआ।

मिला एक गहरा संदेश

इस अनुभव से एरिका को एक बहुत गहरा संदेश मिला— हम सब एक ही ऊर्जा से जुड़े हैं। किसी और को दिया गया दर्द, असल में खुद को दिया गया दर्द ही होता है। यह सोच उनके लिए पूरी तरह नई थी।

नास्तिक से आध्यात्मिक सोच तक का सफर

इस हादसे से पहले एरिका खुद को नास्तिक मानती थीं। उन्हें ईश्वर, आत्मा या मृत्यु के बाद जीवन जैसी बातों पर भरोसा नहीं था। लेकिन इस Near Death Experience ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। आज, करीब 33 साल की उम्र में, एरिका न्यू जर्सी में साइकोथेरेपी से जुड़ा काम कर रही हैं। वह मनोविज्ञान, बॉडी हीलिंग और आध्यात्मिक तरीकों को जोड़कर लोगों की मानसिक और भावनात्मक मदद करती हैं।

विज्ञान क्या कहता है?

विज्ञान Near Death Experience को दिमाग में होने वाले रसायनिक बदलाव, ऑक्सीजन की कमी और गंभीर ट्रॉमा से जोड़कर देखता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे हालात में दिमाग अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। लेकिन एरिका जैसी कई सच्ची घटनाएं लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या मौत के बाद वाकई कुछ और भी है?

डरावनी नहीं, बल्कि सोच बदल देने वाली कहानी

एरिका टेट की कहानी डराने वाली नहीं है। यह एक रहस्यमयी याद दिलाने वाली दास्तान है कि शायद जिंदगी सिर्फ सांस लेने तक सीमित नहीं है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन की कद्र करें, दूसरों के प्रति दयालु बनें और अपने फैसलों के असर को समझें।

मौत के बाद क्या होता है—इस सवाल का जवाब भले साफ न हो, लेकिन ऐसी कहानियां जिंदगी को नए नजरिए से देखने की वजह जरूर बन जाती हैं।

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