भ्रष्टाचार सूचकांकः डेनमार्क और न्यूजीलैंड पहले, भारत 80वें स्थान पर

Edited By Updated: 24 Jan, 2020 12:47 AM

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सपरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआइ) में दुनिया के 180 देशों के आंकड़े जारी किये हैं। इस सूची में भारत का स्थान 80वां है। विशेषज्ञों और बिजनेस के क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक व‌र्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की...

इंटरनेशनल डेस्कः ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआइ) में दुनिया के 180 देशों के आंकड़े जारी किये हैं। इस सूची में भारत का स्थान 80वां है। विशेषज्ञों और बिजनेस के क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक व‌र्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में जारी सीपीआइ की रिपोर्ट में 180 देशों और क्षेत्रों की रैंकिंग उनके यहां सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के आधार पर तय की गई है। इस सूची में डेनमार्क और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से शीष पर बने हुए हैं। उसके बाद फिनलैंड, सिंगापुर, स्वीडन और स्विटजरलैंड का स्थान है। सातवें स्थान पर नॉर्वे, आठवें पर नीदरलैंड और नौवें स्थान पर जर्मनी और लग्जमबर्ग हैं। भारत 41 अंकों के साथ 80वें स्थान पर है।

 

भारत के साथ ही इस स्थान पर चीन, बेनिन, घाना और मोरक्को भी बने हुए हैं। पड़ोसी पाकिस्तान 120वें स्थान पर है। अपने पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की स्थिति ठीक तो है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले वह 2 पायदान नीचे फिसल गया है। पिछले साल भारत 78वें स्थान पर था। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने कहा कि जिन देशों में चुनाव में बड़े पैमाने पर पैसे का इस्तेमाल होता है और जहां सरकारें अमीर व रसूखदार लोगों की ही सुनती है, वहां भ्रष्टाचार ज्यादा है। गैर सरकारी एजेंसी ने कहा है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों में बड़े कॉरपोरेट समूह राजनीतिक दलों को अनुचित और अपारदर्शी तरीके से पैसे देकर नियमों को प्रभावित करते हैं, जिसके चलते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना कठिन हो जाता है।  

 

 

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