सिर्फ 2 फीसदी कैनेडियन खालिस्तान के पक्ष में, इन्हें कैनेडा में ही खालिस्तान बना लेना चाहिए : उज्जल दोसांझ

Edited By Updated: 22 Sep, 2023 12:45 PM

2 percent canadians are in favor of khalistan  ujjal dosanjh

ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर रहे उज्जवल दोसांझ ने कहा है कि कैनेडा की 2 प्रतिशत सिख आबादी खालिस्तान चाहती है और मुझे लगता है कि कनाडा की सरकार को उन खालिस्तान अर्य या सैसके चुआन में दे देना चाहिए। एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में दोसांझ ने...

नेशनल डेस्क: ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर रहे उज्जवल दोसांझ ने कहा है कि कैनेडा की 2 प्रतिशत सिख आबादी खालिस्तान चाहती है और मुझे लगता है कि कनाडा की सरकार को उन खालिस्तान अर्य या सैसके चुआन में दे देना चाहिए। एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में दोसांझ ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो ने संसद में खड़े होकर भारत के खिलाफ आरोप लगाए हैं. इसका मतलब है कि उसका कुछ आधार उनके पास होगा, लेकिन मेरी चिंता यह है कि उन्होंने इसके संबंध में कोई प्रमाण सामने नहीं रखा है। यदि रॉयल कैनेडियन माऊंटेड पुलिस इस मामले में जांच पूरी कर लेती और चार्ज फ्रेम कर देती और उसके बाद प्रधानमंत्री बयान जारी करते तो यह ज्यादा बेहतर स्थिति होती लेकिन इसके बावजूद यदि यह आरोप सही हैं और हरदीप सिंह नहर की हत्या के पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है तो मैं इसकी निंदा करता हूँ।

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भारत और कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन के बिना सम्बन्धों में सुधार मुश्किल
उन्होंने कहा कि भारत और कैनेडा के रिश्ते इस समय बहुत खराब स्थिति में पहुंच गए हैं और अब इनमें सुधार के लिए दोनों देशों में राजनीतिक नेतृत्व में परिवर्तन की जरूरत है। जब तक दोनों देशों में राजनीतिक परिवर्तन नहीं करों में सुधार की उम्मीद कम है क्योंकि दोनों सरकारों के मध्य विश्वास की कमी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाहुबल के राष्ट्रवाद में यकीन करते हैं, जबकि जस्टिन टूडो की अप्रोच एक जागरूक नेता की है। इस स्तर पर हमें समझदारी दिखाने की जरूरत है और रिश्तों पर जमी बर्फ हटाने की जरूरत है।

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पंजाब में कोई खालिस्तान नहीं चाहता
उन्होंने कहा कि वह इस साल पंजाब में होकर आए हैं और पंजाब में कोई भी खालिस्तान नहीं चाहता, यदि कैनेडा में लोग खालिस्तान की मांग कर रहे हैं तो इंडिया को इससे तरजीह नहीं देनी चाहिए। ये महज नारे लगाने लोग है। जहां तक रिफ्रडम की बात है, प्रदर्शन और रिफ्रडम लोकतंत्र का हिस्सा है, यहां तक कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि यदि आप शांतिपूर्वक तरीके से बिना हिंसा हुए खालिस्तान की मांग करते हैं तो यह अपराध नहीं है। कनाडा के गुरुद्वारों में कुछ लोग अलगाववाद की चिंगारी सुलगाते हैं, जिससे भावनाएं भड़कती हैं। इनमें से कई लोग भारत में खालिस्तान बनाने की बात कर रहे हैं, जबकि भारत में खालिस्तान का कोई आधार नहीं है। कैनेडा में पैदा हुए युवाओं ने कभी भारत के बारे में अनुभव नहीं किया और वे अपने अभिभावकों के बताए रास्ते पर चल रहे हैं और जो यहां पर नए आए हैं, वे नेकीत हासिल करने के लिए शरणार्थी बनने हेतु भारत विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने वाले जाते हैं ताकि शरणार्थी बनने के पीछे प्रमाण जुटाए जा सके।

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