8th Pay Commission: कितना मिलेगा एरियर और कितनी बढ़ेगी सैलरी? समझें पूरा गणित

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 11:10 AM

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देश के लगभग एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नया साल 2026 उम्मीदों और जिज्ञासाओं का पिटारा लेकर आया है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है—आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) कब लागू होगा? हालांकि सरकारी गलियारों में हलचल तेज...

नेशनल डेस्क: देश के लगभग एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नया साल 2026 उम्मीदों और जिज्ञासाओं का पिटारा लेकर आया है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है—8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) कब लागू होगा? हालांकि सरकारी गलियारों में हलचल तेज है, लेकिन वेतन वृद्धि की सटीक तारीख और एरियर को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने इस आयोग के 'टर्म ऑफ रेफरेंस' को हरी झंडी दिखाते हुए इसके चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्तियों पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद से ही कर्मचारी संगठनों के साथ परामर्श और सिफारिशें तैयार करने का दौर युद्ध स्तर पर जारी है।

इंतजार लंबा क्यों? सरकार का क्या है प्लान?

नया साल शुरू होते ही कई कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जनवरी 2026 से नया वेतन ढांचा जमीन पर उतर आएगा, लेकिन प्रशासनिक हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार ने आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वेतन संशोधन और सबसे महत्वपूर्ण 'फिटमेंट फैक्टर' पर कोई भी अंतिम निर्णय आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि बढ़ा हुआ वेतन और उसका एरियर खाते में कब तक क्रेडिट होगा।

7वें वेतन आयोग का वो गणित, जिसे समझना जरूरी है

आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच पिछले वेतन आयोग (7th CPC) के आंकड़ों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही भविष्य की बुनियाद तय करेंगे। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। इसके जरिए न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था। पहली नजर में यह वृद्धि कागजों पर 157 प्रतिशत की छलांग लगती है, लेकिन अगर गहराई से देखें तो वास्तविक वेतन वृद्धि (Real Pay Hike) केवल 14 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह गई थी।

महंगाई और वास्तविक बढ़ोतरी: फिटमेंट फैक्टर का असली चेहरा

सातवें वेतन आयोग ने फिटमेंट फैक्टर को दो मुख्य हिस्सों में बांटा था। पहला था 'इन्फ्लेशन एडजस्टमेंट कंपोनेंट' (2.25) और दूसरा था 'रियल पे हाईक कंपोनेंट' (0.32)। इसे आसान भाषा में समझें तो 1 जनवरी 2016 तक महंगाई भत्ता (DA) 125% तक पहुंच चुका था। जब इस 1.25 की वैल्यू को बेसिक पे (1.00) में मर्ज किया गया, तो संशोधित बेस 2.25 बन गया। यह हिस्सा केवल बढ़ती महंगाई के साथ तालमेल बैठाने के लिए था। इसके ऊपर आयोग ने 14.22% की वास्तविक वेतन वृद्धि की सिफारिश की, जिससे 0.32 का अतिरिक्त कंपोनेंट जुड़ा और कुल फिटमेंट फैक्टर 2.57 बना। यही वजह है कि महंगाई भत्ता शामिल होने के कारण कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक बढ़ोतरी सीमित रही थी।

अब आगे क्या? सिफारिशों पर टिकी है नजर

फिलहाल आठवें वेतन आयोग के लिए ग्राउंड वर्क जोरों पर है। विभिन्न मंत्रालयों से डेटा जुटाया जा रहा है और कर्मचारी यूनियनों की मांगों को सुना जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि वेतन बढ़ेगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि इस बार 'रियल हाईक' कितना होगा और क्या सरकार सातवें वेतन आयोग के मुकाबले फिटमेंट फैक्टर में बड़ी राहत देगी। फिलहाल, सैलरी स्लिप में होने वाला कोई भी बदलाव पूरी तरह से आयोग की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद सरकार द्वारा लिए जाने वाले कैबिनेट के फैसले पर निर्भर है। अटकलों के बाजार के बीच कर्मचारी अब बस उस औपचारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं जो उनके भविष्य की आर्थिक दिशा तय करेगा।


 

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