Edited By Parveen Kumar,Updated: 19 Jan, 2026 06:06 PM

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से सामने आया यह मामला पहली नजर में चौंकाता है, लेकिन गहराई में जाएं तो यह सिस्टम की बड़ी चूक और गरीब की मजबूरी की भयावह तस्वीर दिखाता है। रुदामऊ गांव का रहने वाला गोविंद कुमार दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट...
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से सामने आया यह मामला पहली नजर में चौंकाता है, लेकिन गहराई में जाएं तो यह सिस्टम की बड़ी चूक और गरीब की मजबूरी की भयावह तस्वीर दिखाता है। रुदामऊ गांव का रहने वाला गोविंद कुमार दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालता है। लेकिन एक दिन उसके जीवन में ऐसा झटका लगा, जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
दरअसल, गोविंद को आयकर विभाग की ओर से 7 करोड़ 15 लाख 92 हजार 786 रुपये की टैक्स देनदारी का नोटिस मिला। नोटिस देखते ही घर में हड़कंप मच गया। जिस परिवार के लिए महीने भर का राशन जुटाना भी मुश्किल है, उस पर करोड़ों रुपये का बोझ किसी बुरे सपने से कम नहीं था।
यहीं से खुलती है रहस्यमयी परतें
नोटिस मिलने के बाद गोविंद की पत्नी सोनी देवी और बुजुर्ग माता-पिता बदहवास हो गए। सभी के मन में एक ही सवाल था- एक गरीब मजदूर के खाते में करोड़ों रुपये आखिर आए कहां से? जांच-पड़ताल करने पर कहानी करीब छह साल पुरानी निकली।
गोविंद काम की तलाश में कानपुर गया था। वहां कुछ लोगों ने उसे सरकारी मदद और रोजगार दिलाने का झांसा दिया। इसी बहाने एक महिला उसे सीतापुर के बिसवां ले गई, जहां एचडीएफसी बैंक में उसके नाम से खाता खुलवाया गया। बदले में गोविंद को सिर्फ दो-तीन हजार रुपये थमा दिए गए और उसकी पासबुक व चेकबुक अपने पास रख ली गई।
मजदूर बना जालसाजों का मोहरा
आशंका है कि इसी खाते के जरिए जालसाजों ने फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया। गोविंद को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब आयकर विभाग की टीम गांव पहुंची और पुराने नोटिस व बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी दी, तब जाकर सच्चाई सामने आई।
परिवार की हालत बेहद दयनीय है। न खेती की जमीन है, न कोई स्थायी आमदनी। बड़ा भाई ठेला लगाता है, छोटा भाई मजदूरी करता है। ऐसे में करोड़ों के नोटिस ने पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक संकट में डाल दिया।
पीड़ित की गुहार, सिस्टम पर सवाल
गोविंद कुमार का साफ कहना है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। उसने पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। वहीं उसकी मां कमला देवी का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी, नोटिस आने के बाद ही सब कुछ पता चला।
अब बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े ट्रांजेक्शन के दौरान बैंक की निगरानी व्यवस्था कहां थी? आखिर गरीब मजदूर के नाम पर चल रहे करोड़ों के खेल को किसने नजरअंदाज किया? और सबसे अहम- ऐसे जालसाजों पर कार्रवाई कब होगी?
गोविंद का मामला उन हजारों मजदूरों के लिए चेतावनी है, जो थोड़े से लालच या मजबूरी में अपने दस्तावेज दूसरों को सौंप देते हैं। फिलहाल पूरे गांव और जिले की नजरें जांच और इंसाफ पर टिकी हैं।