पाक का समर्थन किए जाने से तुर्की और अजरबैजान पर फूटा गुस्सा, दोनों देशों के बायकाट के लिए तेज हुई मुहिम

Edited By Updated: 07 May, 2025 09:24 PM

anger erupted against türkiye and azerbaijan for supporting pakistan

भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तुर्की और अजरबैजान द्वारा पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत में इन दोनों देशों के खिलाफ गुस्सा फुट पड़ा है। भारतीय नागरिक सोशल मीडिया पर इन दोनों देशों का बहिष्कार किए जाने की मुहिम चला...

नेशनल डेस्क: भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तुर्की और अजरबैजान द्वारा पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत में इन दोनों देशों के खिलाफ गुस्सा फुट पड़ा है। भारतीय नागरिक सोशल मीडिया पर इन दोनों देशों का बहिष्कार किए जाने की मुहिम चला रहे हैं। सोशल मीडिया के यूजर्स तुर्की को सांप बता रहे हैं और तुर्की की एयरलाइंस और अन्य सामान के बायकाट की मुहिम चलाई जा रही है।  यूजर्स का कहना है कि भारत ने तुर्की में आए भूकंप के दौरान सबसे पहले सामान भेज कर उसकी मदद की और जब पाकिस्तान के भेजे आतंकियों ने पहलगाम में आतंकी हमला किया तो तुर्की ने पाकिस्तान में अपने जंगी जहाज भेज दिए।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वरिष्ठ फेलो सुशांत सरीन ने भारतीय नीति-निर्माताओं की आलोचना करते हुए लिखा, “हम सांपों को खाना खिलाते हैं और फिर आश्चर्य करते हैं कि वे क्यों डसते हैं। तुर्किए हमसे लाभ उठाता है और फिर हमें खुलेआम धोखा देता है।”

वेंचर कैपिटलिस्ट राजीव मंती ने कहा कि तुर्की  ने भारत को सशस्त्र ड्रोन बेचने से इनकार कर दिया, जबकि उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश को ये ड्रोन आपूर्ति किए। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत तुर्की कंपनियों को आर्थिक रूप से समर्थन क्यों दे रहा है, जबकि देश की घरेलू रक्षा स्टार्टअप कंपनियां देरी और भुगतान की कमी से जूझ रही हैं।

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एक अन्य यूज़र अरविन्द ने एक्स पर लिखा कि भारत से तुर्की जाने वाले पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही  है, जबकि तुर्की हर वर्ष पाकिस्तान और चीन के साथ मिलकर भारत के आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों को नुकसान पहुँचा रहा है- यहाँ तक कि अब यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर सीधी सैन्य मदद भी दे रहा है।भारतीयों से अपील है कि इस आतंक समर्थक तुर्की के पर्यटन का बहिष्कार करें।यदि आपके परिवार या मित्रों में कोई तुर्की एयरलाइंस से यात्रा करता है या तुर्की घूमने जाता है, तो उन्हें शर्म की नज़र से देखें।ऐसे लोगों को इस तरह देखें जैसे उनमें कोई आत्म-सम्मान नहीं है, और ना ही देश के लिए कोई प्रतिबद्धता।यही एकमात्र तरीका है जिससे हम अपने ही कुछ लोगों को यह समझा सकते हैं कि अपने स्वार्थ के लिए दुश्मनों को समर्थन देना एक मूर्खता है जिसे अब रोका जाना चाहिए।

जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के प्रोफेसर अश्विनी मोहापात्रा ने कहा, " तुर्की ने पाकिस्तान को उसकी सीमाओं की रक्षा में मदद करने के लिए हथियार और ड्रोन भेजे हैं। भारत को तुर्की द्वारा 1974 से कब्जाए गए  साइप्रस के उस उत्तरी हिस्से की आजादी के लिए अलगाववादी पी के के को समर्थन दे कर उसी की भाषा में इसका जवाब देना चाहिए।

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तुर्की ने दिया पाकिस्तान को समर्थन

तुर्की  ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "हम पाकिस्तान और भारत के बीच घटनाक्रम पर चिंता के साथ नजर रख रहे हैं। भारत द्वारा कल रात (6 मई) किया गया हमला एक व्यापक युद्ध का खतरा पैदा करता है। हम ऐसे भड़काऊ कदमों और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हमलों की निंदा करते हैं। "हम दोनों पक्षों से सामान्य बुद्धि का प्रयोग करने तथा एकतरफा कार्रवाई से बचने का आग्रह करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे और आतंकवाद विरोधी क्षेत्र सहित आवश्यक तंत्रों को लागू किया जाएगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। हम 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान के आह्वान का भी समर्थन करते हैं।"

अजरबैजान भी पाकिस्तान के साथ आया

अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय के फॉरेन पॉलिसी डिपार्टमेंट की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान पर सैन्य हमलों की निंदा करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई नागरिक हताहत और घायल हुए हैं। पाकिस्तानी लोगों के साथ एकजुटता में, हम निर्दोष पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक तरीकों से संघर्ष को हल करने का आह्वान करते हैं।"

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भारत ने भूकंप में सबसे पहले पहुंचाई थी मदद

गौर तलब है कि 6 फरवरी 2023 को तुर्की में आए भयंकर भूकंप के बाद भारत में "आपरेशन दोस्त" के तहत तुर्की  में छह सी-17 विमान भेजे थे। इन विमानों के जरिए भारत ने आपातकालीन स्थिति में 250 से अधिक प्रशिक्षित भारतीय कर्मियों को विशेष उपकरणों, वाहनों और राहत सामग्री के साथ तुर्की  पहुँचाया गया। इन टीमों ने सक्रिय रूप से खोज एवं बचाव कार्यों में हिस्सा लिया और एक  फील्ड अस्पताल के माध्यम से चिकित्सीय उपचार प्रदान किया, जो जीवनरक्षक और अंगरक्षक सर्जरी तक करने में सक्षम था। भारत ने इस कठिन समय में तुर्की की जनता के प्रति एकजुटता और सहानुभूति दर्शाते हुए चिकित्सीय उपकरण और राहत सामग्री भी भेजी।

अजरबैजान में गए 115,000 से अधिक पर्यटक

इस बीच 2023 में भारत अज़रबैजान का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.435 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसी वर्ष भारत अज़रबैजान के कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार  भी बना। इसी वर्ष भारत के  115,000 से अधिक पर्यटक अजरबैजान गए जो 2022 की तुलना में लगभग दोगुना थे । रूस, तुर्की और ईरान के बाद भारत अज़रबैजान में चौथा सबसे बड़ा पर्यटक स्रोत है। दिल्ली और बाकू के बीच सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाकर प्रति सप्ताह 10 कर दी गई है, जबकि मुंबई और बाकू के बीच प्रति सप्ताह 4 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।

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