Cancer Awareness: सावधान! यह है दुनिया का सबसे घातक कैंसर, साइलेंट किलर की तरह शरीर को करता है खत्म

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 12:09 PM

beware this is the world s deadliest cancer destroying the body like a silent

कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। अगर इसे समय रहते पहचान नहीं लिया गया तो इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी जल्दी कैंसर का पता चले, उतना ही उसका इलाज...

नेशनल डेस्क: कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। अगर इसे समय रहते पहचान नहीं लिया गया तो इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी जल्दी कैंसर का पता चले, उतना ही उसका इलाज प्रभावी हो सकता है। कैंसर के खतरे को उसकी स्टेज यानी बीमारी के स्तर के आधार पर मापा जाता है, और यही मरीज की बचने की संभावना को निर्धारित करता है।

कैसे बचें और समय रहते पहचानें
अक्सर लोगों के मन में कुछ खास प्रकार के कैंसर को लेकर ज्यादा डर बना रहता है, जैसे ब्लड कैंसर। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कोई एक “सबसे खतरनाक” कैंसर नहीं है। डॉ. नेहा गर्ग, वरिष्ठ सलाहकार और चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग प्रमुख, एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल, सोनीपत के अनुसार पैंक्रियाटिक कैंसर, लिवर कैंसर, छोटी कोशिका फेफड़ों का कैंसर और ग्लियोब्लास्टोमा यानी दिमाग का कैंसर सबसे घातक माने जाते हैं।

पैंक्रियाटिक कैंसर में मरीज के 5 साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 8.3 से 13 प्रतिशत के बीच होती है, जबकि लिवर कैंसर में यह औसतन 13.4 प्रतिशत है। ग्लियोब्लास्टोमा में 5 साल तक जीवित रहने की दर 12.9 प्रतिशत होती है और औसत जीवनकाल 12 से 18 महीने होता है। छोटी कोशिका फेफड़ों का कैंसर मरीज के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसमें 5 साल तक जीवित रहने की संभावना 7 प्रतिशत से भी कम रहती है। एसोफेजियल कैंसर में 16.3 प्रतिशत तक मरीज की जान बच सकती है।


सबसे खतरनाक कैंसर कौन-कौन से हैं?
कैंसर के खतरे को कम करने और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने का सबसे असरदार तरीका समय पर जांच कराना है। अपने शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अगर परिवार में किसी को कैंसर रहा है, तो नियमित जांच कराते रहना चाहिए। जल्दी पहचान होने पर इलाज तुरंत शुरू किया जा सकता है और मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

 

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