Edited By Radhika,Updated: 18 Jan, 2026 04:46 PM

RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने समाज में गहराई तक बैठी जातिवाद की समस्या पर कड़ा प्रहार किया है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक जन संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि समाज ईमानदारी से प्रयास करे, तो अगले एक दशक के भीतर भारत से...
नेशनल डेस्क: RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने समाज में गहराई तक बैठी जातिवाद की समस्या पर कड़ा प्रहार किया है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक जन संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि समाज ईमानदारी से प्रयास करे, तो अगले एक दशक के भीतर भारत से जातिगत भेदभाव को पूरी तरह मिटाया जा सकता है।
इतिहास से भेदभाव तक का सफर
भागवत ने जाति प्रथा के ऐतिहासिक पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्राचीन काल में जाति का संबंध केवल पेशे और काम से था। समय के साथ यह व्यवस्था जटिल होती गई और इसने भेदभाव का रूप ले लिया, जो आज समाज के लिए एक चुनौती बन गई है। उन्होंने जोर देकर कहा, "जाति को खत्म करने के लिए सबसे पहले उसे अपने मन से बाहर निकालना होगा। जब तक हम मानसिक रूप से जातियों में बँटे रहेंगे, भेदभाव बना रहेगा।"

खुद को नहीं, समाज को बड़ा बनाना है संघ का लक्ष्य
सवालों का जवाब देते हुए संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि RSS का उद्देश्य स्वयं को शक्तिशाली बनाना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र को उसके सर्वोत्तम गौरव तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा, "संघ किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करता, यह समाज को एकजुट और बड़ा बनाने के लिए समर्पित है।" उन्होंने लोगों को आमंत्रित किया कि संघ की कार्यप्रणाली को समझने के लिए उन्हें शाखाओं में व्यक्तिगत रूप से आना चाहिए।