ऑफ द रिकॉर्ड: प्रवर्तन निदेशालय में भी सी.बी.आई. जैसा संकट

Edited By Pardeep,Updated: 01 Apr, 2019 05:21 AM

cbi also in ed as crisis

यदि आप सोचते हैं कि मोदी राज में केवल सी.बी.आई. में ही शक्ति संकट था तो आप गलत हैं। इसी तरह का संकट अब ई.डी. में भी है। हालांकि तत्काल संकट अभी टल गया है लेकिन सत्ता का यह संघर्ष अभी पूरी तरह से थमा नहीं है। ई.डी. में यह संकट तब पैदा हुआ जब वनीत...

नेशनल डेस्क: यदि आप सोचते हैं कि मोदी राज में केवल सी.बी.आई. में ही शक्ति संकट था तो आप गलत हैं। इसी तरह का संकट अब ई.डी. में भी है। हालांकि तत्काल संकट अभी टल गया है लेकिन सत्ता का यह संघर्ष अभी पूरी तरह से थमा नहीं है। ई.डी. में यह संकट तब पैदा हुआ जब वनीत अग्रवाल विशेष निदेशक (पश्चिमी जोन) ने 20 मार्च को सत्यव्रत कुमार को तत्काल प्रभाव से रिलीव करने का आदेश दे दिया। 
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सत्यव्रत एक आई.आर.एस. अधिकारी हैं जिनका प्रवर्तन निदेशक संजीव कुमार मिश्रा से सीधा संबंध है। ई.डी. में यह संघर्ष तब पैदा हुआ जब सत्व्रत जो कि नीरव मोदी केस के इंचार्ज भी हैं, ने आरोप लगाया कि वनीत अग्रवाल ने उन्हें परोक्ष रूप से नुक्सान पहुंचाया। यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें इस मामले में ई.डी. मुख्यालय से भी विमर्श नहीं किया। अंत में घंटों में ही आदेश रद्द हो गए। वनीत ने सत्यव्रत को कोल ब्लाक आबंटन मामलों को छोड़कर सभी मामलों से रिलीव कर दिया था। 
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ई.डी. के डिप्टी डायरैक्टर रोहित आनंद (ईस्ट जोन) ने कहा कि सत्यव्रत कुमार दूसरा आदेश आने तक मुम्बई जोनल ऑफिस-1 का कार्यभार देखते रहेंगे। कानून के हिसाब से ई.डी. के पश्चिमी विंग के मुखिया वनीत अग्रवाल द्वारा सत्यव्रत का रिलीव करना सहीं था क्योंकि उनका बतौर डैपुटेशन 5 साल की अवधि समाप्त हो गई थी। अग्रवाल ने यह भी कहा कि डी.ओ.पी.टी. के आदेश में यह भी कहा गया है कि यह वरिष्ठ अधिकारी की ड्यूटी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि डैपुटेशन पर आया कोई अधिकारी ओवर स्टे न करे। इसलिए अग्रवाल ने बिना किसी अप्रूवल के सत्यव्रत को रिलीव करने के आदेश जारी कर दिए। 

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