बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर CBSE ने उठाया बड़ा कदम, अब स्कूलों में बनेंगे 'शुगर बोर्ड', छात्रों के चीनी सेवन पर रखी जाएगी नज़र

Edited By Updated: 23 May, 2025 04:13 PM

cbse mandates sugar boards in schools for child health

बच्चों में बढ़ते स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए CBSE ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधिकारियों के अनुसार, CBSE ने अपने संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे बच्चों के चीनी सेवन पर कड़ी निगरानी रखें।

नेशनल डेस्क:  बच्चों में बढ़ते स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए CBSE ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधिकारियों के अनुसार, CBSE ने अपने संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे बच्चों के चीनी सेवन पर कड़ी निगरानी रखें। साथ ही उसे कम करने के लिए विशेष प्रयास करें। इसके लिए स्कूलों को 'शुगर बोर्ड' स्थापित करने के लिए कहा गया है।

CBSE द्वारा यह नोटिस किया गया है कि पिछले एक दशक में बच्चों में टाइप 2 मधुमेह यानि की डायबिटीज के मामलों में खतरनाक वृद्धि हुई है। पहले ये बीमारी केवल वयस्कों में ही देखी जाती थी। यह बीमारी बच्चों के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है।

अत्यधिक चीनी का सेवन: एक गंभीर समस्या-

CBSE ने स्कूल के प्रिंसीपलों को लिखे एक पत्र में इस गंभीर समस्या पर प्रकाश डाला। बोर्ड ने कहा, "यह खतरनाक प्रवृत्ति मुख्य रूप से चीनी के अधिक सेवन के कारण है, जो अक्सर स्कूल के वातावरण में मीठे स्नैक्स, पेय पदार्थों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की आसानी से उपलब्धता के कारण होता है।"

बोर्ड ने आगे बताया कि चीनी के अत्यधिक सेवन से न केवल मधुमेह का खतरा बढ़ता है। अध्ययनों से पता चला है कि 4 से 10 साल की आयु के बच्चों के लिए दैनिक कैलोरी सेवन में चीनी का हिस्सा 13% है और 11 से 18 साल के  बच्चों के बच्चों के लिए यह 15% है। यह आंकड़ा WHO द्वारा अनुशंसित 5% की सीमा से कहीं अधिक है। बोर्ड ने कहा कि स्कूल के वातावरण में आसानी से उपलब्ध मीठे स्नैक्स, पेय पदार्थों का सेवन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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NCPCR के आग्रह पर CBSE का निर्देश-

यह महत्वपूर्ण निर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के आग्रह के बाद जारी किया गया है। बता दें कि NCPCR एक statutory body है।  

'शुगर बोर्ड' क्या हैं और उनका क्या काम होगा?

स्कूलों को अब 'शुगर बोर्ड' स्थापित करने के लिए कहा गया है। इन बोर्डों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अत्यधिक चीनी के सेवन के जोखिमों के बारे में जागरूक और शिक्षित करना होगा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इन 'शुगर बोर्डों' पर निम्नलिखित आवश्यक जानकारी प्रदर्शित की जानी चाहिए:

  • अनुशंसित दैनिक चीनी का सेवन कितना होना चाहिए।
  • आम तौर पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों (जैसे जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स आदि जैसे अस्वास्थ्यकर भोजन) में चीनी की मात्रा कितनी होती है
  • उच्च चीनी के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम क्या-क्या हैं।
  • बच्चों के लिए स्वस्थ आहार विकल्प कौन से हैं।

CBSE का मानना है कि यह जानकारी छात्रों को सूचित भोजन विकल्पों के बारे में जानकारी देगी और उनके बीच दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, स्कूलों को इस संबंध में जागरूकता सेमिनार और कार्यशालाएँ आयोजित करने के लिए भी कहा गया है। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे 15 जुलाई से पहले इस पहल से संबंधित एक संक्षिप्त रिपोर्ट और कुछ तस्वीरें CBSE पोर्टल पर अपलोड करें। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य प्रयास है।

 

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बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इन 'शुगर बोर्डों' पर निम्नलिखित आवश्यक जानकारी प्रदर्शित की जानी चाहिए:

  • अनुशंसित दैनिक चीनी का सेवन कितना होना चाहिए।
  • आम तौर पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों (जैसे जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स आदि जैसे अस्वास्थ्यकर भोजन) में चीनी की मात्रा कितनी होती है।
  • उच्च चीनी के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम क्या-क्या हैं।
  • बच्चों के लिए स्वस्थ आहार विकल्प कौन से हैं।

CBSE का मानना है कि यह जानकारी छात्रों को सूचित भोजन विकल्पों के बारे में जानकारी देगी और उनके बीच दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, स्कूलों को इस संबंध में जागरूकता सेमिनार और कार्यशालाएँ आयोजित करने के लिए भी कहा गया है। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे 15 जुलाई से पहले इस पहल से संबंधित एक संक्षिप्त रिपोर्ट और कुछ तस्वीरें CBSE पोर्टल पर अपलोड करें। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य प्रयास है।

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