Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 May, 2025 01:00 PM

दुनिया के जासूसी इतिहास में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्होंने अपने असाधारण कौशल और दिलेरी से दुश्मनों को मात दी। आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्यमय जासूस की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता था कि वह पानी के भीतर ही खतरनाक बमों को निष्क्रिय कर...
नेशनल डेस्क। दुनिया के जासूसी इतिहास में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्होंने अपने असाधारण कौशल और दिलेरी से दुश्मनों को मात दी। आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्यमय जासूस की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता था कि वह पानी के भीतर ही खतरनाक बमों को निष्क्रिय कर देता था। यह कहानी है ब्रिटिश नौसेना के कमांडर लियोनेल क्रैब की जिनकी जिंदगी और मौत दोनों ही आज भी एक अनसुलझा रहस्य बनी हुई है।
कौन थे कमांडो लियोनेल क्रैब?
जानकारी के अनुसार लियोनेल क्रैब ब्रिटिश नौसेना के एक मशहूर गोताखोर थे। इसके साथ ही वह ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 के लिए गुप्त जासूसी मिशन भी अंजाम दिया करते थे। साल 1956 में उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई जो आज भी एक पहेली बनी हुई है। उनकी मौत कैसे हुई और उनके शरीर के साथ क्या हुआ यह सवाल आज भी लोगों के मन में घूमता है। क्रैब एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता एक फोटोग्राफी के व्यापारी थे। क्रैब ने अपने जीवन में कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। समुद्री प्रशिक्षण के लिए उन्होंने HMS Conway में दो साल तक कड़ी ट्रेनिंग भी ली थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्रैब ब्रिटिश रॉयल नेवी में शामिल हो गए जहां उन्होंने अपनी असाधारण क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
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पानी में बम डिफ्यूज करने का मास्टर
ब्रिटिश रॉयल नेवी में शामिल होने के बाद लियोनेल क्रैब ने गोताखोरी और पानी के भीतर ही बमों को निष्क्रिय करने की एक विशेष कला में अद्भुत महारत हासिल की। क्रैब को रॉयल नेवी की एक नई गोताखोरी यूनिट का सदस्य बनाया गया और उन्हें दुश्मन द्वारा मित्र देशों के पानी के जहाजों के नीचे या किनारे पर लगाई गई खतरनाक लिम्पेट माइनों को हटाने का बेहद जोखिम भरा काम सौंपा गया था। यह कार्य अत्यंत कठिन और जानलेवा था लेकिन कमांडर लियोनेल क्रैब ने अपनी अद्वितीय क्षमता और साहस से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया जिससे वह नौसेना में एक हीरो के तौर पर उभरे।
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कहां हो गए अचानक गायब?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब 1955 में एक बार फिर शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) की आहट सुनाई देने लगी तो क्रैब को उनके पहले जासूसी मिशन पर भेजा गया लेकिन 29 अप्रैल 1956 को अचानक एक चौंकाने वाली खबर सामने आई कि कमांडर लियोनेल क्रैब रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं या शायद उनकी मौत हो गई है। जब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री से क्रैब की मौत के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने अस्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि यह बताना जनहित में नहीं होगा कि क्रैब की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी। उनकी मौत की असली वजह और उनके लापता होने का रहस्य आज भी एक अनसुलझा राज बना हुआ है जो शीत युद्ध के साये में दफन है।