CRPF जवान बना जासूस! पाकिस्तान को लीक कर रहा था देश की सीक्रेट जानकारी, NIA ने किया अरेस्ट

Edited By Updated: 26 May, 2025 11:57 PM

crpf jawan was spying for pakistan

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी एक नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सहायक उप-निरीक्षक (ASI) मोतीराम जाट को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार...

नेशनल डेस्कः जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी एक नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सहायक उप-निरीक्षक (ASI) मोतीराम जाट को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया है। उन्हें 6 जून तक की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। 

मोतीराम जाट का संदिग्ध नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मोतीराम ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से संपर्क कर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा की, जिसमें सुरक्षा बलों की तैनाती, ऑपरेशनल योजनाएं और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लोकेशन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इसके बदले उन्हें मोटी रकम दी गई थी।

यह मामला "हनी ट्रैप" से जुड़ा प्रतीत होता है, जिसमें आरोपी को लालच या अन्य कारणों से प्रभावित कर संवेदनशील जानकारी लीक करने के लिए प्रेरित किया गया। NIA ने मोतीराम के परिवार और बैंक खातों की भी जांच शुरू कर दी है। 


ट्रांसफर और आतंकी हमला: संयोग या साजिश?

चौंकाने वाली बात यह है कि मोतीराम को पहलगाम से छह दिन पहले ही दूसरे क्षेत्र में ट्रांसफर किया गया था। इस ट्रांसफर के बाद, 22 अप्रैल 2025 को बाइसारन घाटी में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई। इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह "द रेजिस्टेंस फ्रंट" (TRF) ने जिम्मेदारी ली थी, हालांकि बाद में उन्होंने इससे इनकार कर दिया। 

इस संयोग ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मोतीराम का ट्रांसफर और उसके बाद हुआ आतंकी हमला केवल संयोग था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। इस एंगल से भी जांच शुरू कर दी गई है।


कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

गिरफ्तारी के बाद, मोतीराम को CRPF से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर जासूसी, देशद्रोह और UAPA जैसे गंभीर आरोप लगाए जा सकते हैं। दिल्ली की एक अदालत ने NIA को उनकी रिमांड मंजूर की है, जिससे मामले की गहन जांच की जा सके। 

NIA अब यह जांच कर रही है कि मोतीराम के संपर्क में और कौन लोग थे और क्या यह एक संगठित प्रयास था। इसके साथ ही, सुरक्षा बलों के भीतर इस प्रकार की घुसपैठ को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

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