Edited By Parveen Kumar,Updated: 13 Sep, 2023 01:43 AM

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष व सांसद फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को सेब, अखरोट सहित कई अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और इसे वापस नहीं लेने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी।
नेशनल डेस्क: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष व सांसद फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को सेब, अखरोट सहित कई अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और इसे वापस नहीं लेने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी। अब्दुल्ला ने कहा कि जब जी-20 में इन रियायतों की घोषणा की गई, तब यह नहीं सोचा गया कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा और इससे न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि यह हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड भी प्रभावित होगा।
पिछले सप्ताह केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर काबुली चना, मसूर, सेब, अखरोट और ताजा या सूखे बादाम सहित कई अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क हटाने की घोषणा की थी। यह अधिसूचना अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचने से एक दिन पहले जारी की गई। अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका को खुश करने के लिए स्थानीय उत्पादकों को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा,‘‘जम्मू-कश्मीर की प्रमुख अर्थव्यवस्था बागवानी है।
अमेरिका को खुश करने के लिए, केंद्र सरकार स्थानीय उत्पादकों को खत्म करना चाहती है। मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि वह ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे यहां पहले से व्याप्त गरीबी में बढ़ोत्तरी हो और हम एक और संकट में फंस जाएं। अगर वे लोगों के लिए इसे आसान नहीं बनाते हैं, तो हम सड़क पर उतरेंगे और विरोध करेंगे।'' इसबीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पाटर्ी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को समाप्त करना है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पिछले 30-40 वर्षों से कठिन दौर से गुजर रहा है और फल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जिसने जम्मू-कश्मीर को कठिन दौर में भी जीवित रखा लेकिन मुझे लगता है कि अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क में कमी जानबूझकर की जा रही है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (जेकेपीसी) ने भी अमेरिका से सेब आयात पर 20 प्रतिशत शुल्क हटाने के निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की। जेकेपीसी ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता स्थानीय सेब उत्पादकों और किसानों के हितों की रक्षा करनी होनी चाहिए।
जेकेपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्दुल गनी वकील ने एक बयान में कहा कि सेब की खेती राज्य की कृषि में एक अभिन्न स्थान रखती है, जो हमारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और कई किसान परिवारों को आजीविका प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हमारा सेब उद्योग पहले से ही पिछले पांच वर्षों से कोविड के कारण बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहा है और मौसम की अनिश्चितता के कारण इसे भारी नुकसान हुआ है।
इस कदम से समस्या और बढ़ेगी और हमारे उत्पादकों को नुकसान पहुंचेगा। अपनी पाटर्ी के महासचिव रफी अहमद मीर ने भी केंद्र सरकार के निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कदम से कश्मीर में सेब और अखरोट उत्पादकों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उत्पादकों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।