Edited By Radhika,Updated: 15 Jan, 2026 01:50 PM

ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। लगातार बढ़ता हुआ प्रर्दशन ईरानी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA)...
Iran Protest Imapct on India: ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। लगातार बढ़ता हुआ प्रर्दशन ईरानी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इस अस्थिरता का सीधा असर भारत के अरबों डॉलर के निवेश और भविष्य की व्यापारिक रणनीतियों पर पड़ने वाला है।
ईरान में विरोध की वजह
ईरान में गुस्से की मुख्य वजह वहां की चरमराती अर्थव्यवस्था है।
- मुद्रा का पतन: ईरानी रियाल (Rial) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 लाख के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लोगों की बचत कौड़ियों के दाम हो गई है।
- महंगाई और बेरोजगारी: खाने वाली चीज़ों की कीमतों में 42% से ज्यादा की बढ़ोत्तरी और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
- राजनीतिक नाराज़गी: शुरुआत में आर्थिक मुद्दों पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के अंत की मांग में बदल गया है।

भारत के लिए 'ईरान' क्यों है सबसे जरूरी?
भारत के लिए ईरान केवल एक देश नहीं, बल्कि मध्य एशिया और रूस तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। भारत के तीन मुख्य हित दांव पर हैं:
- चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port): भारत ने यहाँ करीब 4,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। यह पाकिस्तान के रास्ते को बायपास कर भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है। चाबहार-जाहेदान रेल लाइन का काम भी 2026 के मध्य तक पूरा होना था, जो अब अधर में लटक सकता है।
- INSTC कॉरिडोर: यह मार्ग भारत से रूस तक माल पहुंचाने का समय 40% और खर्च 30% कम करता है। ईरान में अस्थिरता का मतलब है इस पूरे कॉरिडोर का ठप होना।
- ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार: भारत अभी भी ईरान से तेल और गैस के लिए बातचीत कर रहा है। इसके अलावा भारत से होने वाला बासमती चावल का बड़ा निर्यात पहले ही रुक गया है, जिससे भारतीय व्यापारियों का पैसा फंसने का डर है।
चुनौतियां और खतरे: चीन और अमेरिका का फैक्टर
ईरान में अस्थिरता का सीधा फायदा चीन को मिल सकता है। चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर तेजी से काम कर रहा है। अगर चाबहार प्रोजेक्ट धीमा पड़ा, तो मध्य एशिया का पूरा बाजार भारत के हाथ से निकलकर चीन के पास जा सकता है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी ने भारत की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है।