Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Jan, 2026 06:23 PM

अगर साल 2025 को कमोडिटी निवेशकों की नजर से देखा जाए, तो इसे “सोने-चांदी का रिकॉर्ड ब्रेकर साल” कहा जा सकता है। इस साल सोने और चांदी ने ऐसे स्तर छुए, जो आम निवेशक के लिए कल्पना से परे थे। महंगाई की बढ़ती लहर, वैश्विक राजनीतिक तनाव, युद्ध की आशंकाएं,...
नेशनल डेस्क: अगर साल 2025 को कमोडिटी निवेशकों की नजर से देखा जाए, तो इसे “सोने-चांदी का रिकॉर्ड ब्रेकर साल” कहा जा सकता है। इस साल सोने और चांदी ने ऐसे स्तर छुए, जो आम निवेशक के लिए कल्पना से परे थे। महंगाई की बढ़ती लहर, वैश्विक राजनीतिक तनाव, युद्ध की आशंकाएं, ब्याज दरों की अनिश्चितता और नई टेक्नोलॉजी ने मिलकर इन धातुओं को चमकाया। अब सवाल यह है कि 2026 में क्या यही रफ्तार जारी रहेगी, या नए खिलाड़ी जैसे कॉपर इस साल की कहानी में शामिल होंगे?
2025 में चांदी और सोने की तेजी क्यों थी खास
2025 में सोना और चांदी सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं रहे, बल्कि सुरक्षित धन रखने का विकल्प भी बने। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच लोग अपने पैसे को स्टॉक्स और रियल एस्टेट से निकालकर कीमती धातुओं में लगाने लगे।
चांदी ने इस साल सभी को चौंका दिया। इसकी कीमतों में जबरदस्त उछाल आया, जिससे निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला। इसकी बड़ी वजह थी इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर, 5G और अब AI टेक्नोलॉजी में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी।
2026 में चांदी की स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में चांदी की चमक पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन 2025 जैसी तेज और सीधी रैली दोहराना मुश्किल हो सकता है। केडिया कैपिटल के फाउंडर अजय केडिया के अनुसार, जब किसी एसेट में बहुत तेजी आती है, उसके बाद कुछ समय के लिए स्थिरता या हल्की गिरावट स्वाभाविक होती है। फिर भी लंबी अवधि में चांदी मजबूत बनी हुई है, क्योंकि यह एक साथ इंडस्ट्रियल मेटल और निवेश का साधन है। यही डबल रोल इसे सोने से अलग बनाता है।
सोना: स्थिरता का भरोसेमंद विकल्प
सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है और 2026 में भी इसकी भूमिका वही रहेगी। सोने की मांग मुख्य रूप से बचत और सुरक्षा के लिए होती है, जबकि चांदी और कॉपर की मांग उद्योग में भी है। इसलिए सोने में तेज उछाल की बजाय धीरे-धीरे स्थिर बढ़त देखने को मिलेगी। वॉवेल्थ के डायरेक्टर अनुज गुप्ता का मानना है कि 2026 में भी चांदी, सोने और अन्य धातुओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, क्योंकि इसे “क्रिटिकल मेटल” की श्रेणी में रखा गया है।
कॉपर: 2026 का नया खिलाड़ी?
2025 के अंत में कॉपर अचानक चर्चा में आया। इसका कारण ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन की बढ़ती जरूरतें हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जिंग स्टेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कॉपर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
दुनिया भर में कॉपर की सप्लाई सीमित है और नई माइंस जल्दी शुरू नहीं होतीं। इस डिमांड-सप्लाई के अंतर ने कॉपर की कीमतें ऊपर धकेल दी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में:
निवेशक को सबसे जरूरी है कि लालच और डर में फंसकर जल्दबाजी न करें। एक ही धातु पर पूरा दांव लगाने के बजाय पोर्टफोलियो में संतुलन बनाएं। लंबी अवधि के लिए चांदी और कॉपर में संभावनाएं बनी हुई हैं, जबकि सोना सुरक्षा के लिहाज से अपनी जगह कायम रखेगा।