नए साल में आपके जेब को मिलेगी राहत, कम होगी महंगाई! इस संस्था की बड़ी भविष्यवाणी

Edited By Updated: 13 Dec, 2025 02:49 PM

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एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारत में 2026 में महंगाई में गिरावट की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी सुधारों से वित्त वर्ष 2025-26 में सीपीआई में लगभग 35 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। नवंबर में केरल में महंगाई दर 8.27% रही। जीएसटी कटौती और...

नेशनल डेस्क : नवंबर महीने में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को भले ही झटका लगा हो, लेकिन आने वाला समय राहत देने वाला साबित हो सकता है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में देश की रिटेल महंगाई में करीब 35 बेसिस प्वाइंट तक की गिरावट आने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संभावित राहत में जीएसटी सुधारों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में महंगाई के दबाव में कमी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आकलन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली छूट को शामिल नहीं किया गया है, जो जीएसटी में संभावित कटौती के चलते और बढ़ सकती है। अगर इन कारकों को भी जोड़ा जाए, तो उपभोक्ताओं को महंगाई से और अधिक राहत मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में कुल मिलाकर लगभग 35 बेसिस प्वाइंट की गिरावट संभव है।

केरल में महंगाई दर रही ऊंची
रिपोर्ट में राज्यवार आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है। नवंबर महीने में केरल में महंगाई दर 8.27 प्रतिशत दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक रही। ग्रामीण इलाकों में महंगाई 9.34 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 6.33 प्रतिशत रही। एसबीआई रिसर्च का कहना है कि केरल में सोने, चांदी और तेल एवं वसा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है, क्योंकि इन वस्तुओं की खपत राज्य में अपेक्षाकृत अधिक है।

सीपीआई महंगाई में उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, भारत की सीपीआई महंगाई की चाल में हाल के महीनों में बदलाव देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 में जहां सीपीआई महंगाई 0.25 प्रतिशत थी, वहीं नवंबर 2025 में यह बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई। हालांकि, मार्च 2025 तक इसके 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट में रुपये की कीमत में गिरावट का भी जिक्र किया गया है। कमजोर रुपये के कारण आयात महंगा होने से महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। इसके बावजूद, एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर औसतन 1.8 प्रतिशत रह सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में इसके बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।

ब्याज दरों पर आरबीआई का रुख
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई के मौजूदा रुझानों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फरवरी में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों के रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है। यानी निकट भविष्य में रेपो रेट में कटौती या बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है।

जीएसटी कटौती से महंगाई में और कमी की उम्मीद
महंगाई को लेकर इससे पहले स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल रिसर्च भी सकारात्मक अनुमान जता चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी दरों में कटौती से भारत की अर्थव्यवस्था यानी जीडीपी में 0.1 से 0.16 प्रतिशत अंक तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही सालाना महंगाई में 40 से 60 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है।

‘भारत: जीएसटी में समय पर कटौती’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा है कि जीएसटी में कटौती से सरकारी राजस्व को होने वाला नुकसान सीमित रहने की संभावना है। इससे सरकार के खर्च और आय से जुड़ी चिंताएं भी कुछ हद तक कम हो सकती हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि संयुक्त राजकोषीय घाटे पर दबाव बना रहेगा, जो जीडीपी के लगभग 0.15 से 0.20 प्रतिशत तक हो सकता है।

आर्थिक विकास को मिलेगा सहारा
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट में जीएसटी में किए गए बदलावों को सही समय पर उठाया गया कदम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बीच यह कदम भारत की आर्थिक विकास दर को सहारा देने में मदद करेगा। इसके साथ ही जीएसटी प्रक्रिया में सुधार, जैसे तेज पंजीकरण और रिफंड की व्यवस्था, कारोबार करना आसान बनाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जीएसटी परिषद इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो मध्यम अवधि में देश की आर्थिक विकास संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।

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