आर्मेनिया, अजरबैजान के रास्ते ईरान से भारतीय नागरिक घर लौट रहे हैं : विदेश मंत्रालय

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 10:53 PM

indian nationals are returning home from iran via armenia azerbaijan

विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईरान में फंसे छात्रों सहित लगभग 880 भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते स्वदेश लौटना शुरू कर चुके हैं। साप्ताहिक संवाददाता सममेलन में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता...

नेशनल डेस्क : विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईरान में फंसे छात्रों सहित लगभग 880 भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते स्वदेश लौटना शुरू कर चुके हैं। साप्ताहिक संवाददाता सममेलन में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि ईरान गए 284 तीर्थयात्रियों में से लगभग 280 आर्मेनिया के रास्ते लौट आए हैं, और उनमें से तीन-चार के कुछ दिनों में पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ''कुछ लोग भारतीय दूतावास में पंजीकरण नहीं कराते हैं। इसलिए, हमारा अनुमान था कि लगभग 9,000 लोग (ईरान में) मौजूद होंगे। कई छात्र हमले शुरू होने से पहले ही लौट चुके हैं।''

जायसवाल से ईरान में फंसे उन भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी मांगी गई थी, जो स्वदेश लौटना चाहते हैं। उन्होंने बताया, ''आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते 882 भारतीय नागरिकों के लौटने की उम्मीद है, जिनमें से कुछ लौट चुके हैं। कुल 772 लोग आर्मेनिया के रास्ते और 110 लोग अजरबैजान के रास्ते लौट रहे हैं, जिनमें से कुछ लौट चुके हैं जबकि शेष वापस आ रहे हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय का 4 मार्च को स्थापित नियंत्रण कक्ष पूरी तरह से कार्यरत है और भारतीय नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर रहा है।

जायसवाल ने कहा कि फोन और ईमेल की संख्या में काफी कमी आई है। फंसे हुए लोगों की समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो चुका है और क्षेत्र के विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों की हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''कश्मीर की छात्राओं सहित बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जो ईरान में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हमने एक परामर्श जारी किया था, हमने सभी को अजरबैजान सीमा पार करने से पहले दूतावास से संपर्क करने के लिए कहा था, ताकि वह ईरान-अजरबैजान सीमा पार करने में उनकी सहायता कर सके।''

भारत की एलएनजी आवश्यकता का लगभग 40 प्रतिशत कतर से आता है। जायसवाल ने आज सुबह पश्चिम एशिया की स्थिति पर यहां एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा, ''जी हां, यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, न केवल हमारे लिए, बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए। हमारे नेता अपने समकक्षों के संपर्क में हैं, जैसा कि मैंने अभी हमारे प्रधानमंत्री और कुवैत के युवराज के बीच हुई बातचीत का जिक्र किया। इसी तरह, हम कई अन्य नेताओं के भी संपर्क में हैं।''

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र), असीम आर महाजन ने अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में पत्रकारों को बताया कि विदेश मंत्रालय खाड़ी देशों और व्यापक पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखे हुए है, और भारतीय समुदाय की सुरक्षा ''हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता'' है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 28 लाख यात्री इस क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं।

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