Edited By Tanuja,Updated: 19 Jan, 2026 12:31 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क पर ग्रीनलैंड में रूसी खतरे से न निपट पाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि अब “यह होकर रहेगा।” ट्रंप के बयान से यूरोप-अमेरिका में कूटनीतिक टकराव और गहरा गया है।
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क पर दबाव और तेज कर दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि डेनमार्क पिछले दो दशकों से ग्रीनलैंड में रूस से जुड़े सुरक्षा खतरे का सामना करने में पूरी तरह विफल रहा है और अब अमेरिका इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाएगा। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा,“नाटो पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क से कहता आ रहा है कि ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को दूर किया जाए। दुर्भाग्य से डेनमार्क कुछ नहीं कर पाया। अब समय आ गया है और यह होकर रहेगा।”
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कई यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर गंभीर कूटनीतिक टकराव उभर रहा है। 2025 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को “हासिल करने” की इच्छा जता रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और रूस-चीन की गतिविधियों के चलते अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बेहद अहम है। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और यह डेनमार्क साम्राज्य का स्वायत्त क्षेत्र है। हालांकि रक्षा और विदेश नीति पर नियंत्रण अब भी कोपेनहेगन के पास है। अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में एक बड़ा सैन्य अड्डा संचालित करता है।
इस बीच यूरोपीय देशों ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों के खिलाफ साझा रणनीति बनानी शुरू कर दी है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि यूरोप एकजुट है और उन्हें महाद्वीपीय समर्थन पर कोई संदेह नहीं है। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ एडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।” ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, जो जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो सकता है यदि ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर यह टकराव नाटो, यूरोप-अमेरिका संबंधों और आर्कटिक क्षेत्र की स्थिरता पर दूरगामी असर डाल सकता है।