'सचिव का ट्रांसफर नहीं कर रही केंद्र', दिल्ली का बॉस बनने के एक दिन बाद फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केजरीवाल सरकार

Edited By Updated: 12 May, 2023 01:47 PM

kejriwal government again reached the supreme court

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार यह आरोप लगाते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची कि केंद्र उसके सेवा विभाग के सचिव के तबादले को लागू नहीं कर रहा है।

नेशनल डेस्क: दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार यह आरोप लगाते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची कि केंद्र उसके सेवा विभाग के सचिव के तबादले को लागू नहीं कर रहा है। एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए कहा था कि लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि जैसे विषयों को छोड़कर अन्य सेवाओं के संबंध में दिल्ली सरकार के पास विधायी तथा शासकीय नियंत्रण है। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वह अगले हफ्ते मामले की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेंगे।

 

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने CJI और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने कल ही फैसला सुनाया है और यह अवमानना का मामला हो सकता है। सिंघवी ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत इस अदालत के आदेश की अवमानना हो सकती है और एक पीठ को इस पर तत्काल सुनवाई करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "वे कह रहे हैं कि हम किसी का तबादला नहीं करेंगे। कल सुनाए गए फैसले के मद्देनजर मैं अवमानना याचिका दायर कर सकता हूं लेकिन इसमें समय लगेगा। इसलिए कृपया मामले को सूचीबद्ध करें।'' आप सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्थानांतरण-पदस्थापना पर नियंत्रण प्रदान करने के कुछ घंटे बाद ही दिल्ली सरकार के सेवा विभाग के सचिव आशीष मोरे को उनके पद से हटा दिया गया।

 

दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ए के सिंह, मोरे का स्थान लेंगे। सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1995 बैच एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। सुप्रीम कोर्ट के CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने कहा कि नौकरशाहों पर एक निर्वाचित सरकार का नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली का ‘विशेष प्रकार का' दर्जा है और उन्होंने न्यायाधीश अशोक भूषण के 2019 के उस फैसले से सहमति नहीं जतायी कि सेवाओं पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण / अधिकार नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र तथा दिल्ली सरकार के बीच सेवाओं पर प्रशासनिक नियंत्रण के विवादित मुद्दे पर अपने फैसले में कहा कि केंद्र की शक्ति का कोई और विस्तार संवैधानिक योजना के प्रतिकूल होगा...दिल्ली अन्य राज्यों की तरह ही है और उसकी भी एक चुनी हुई सरकार की व्यवस्था है।

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