Mahashivratri 2026: महादेव को प्रसन्न करने का आसान उपाय – महाशिवरात्रि पर करें ये खास दान

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 06:46 PM

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हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। यह पावन पर्व भगवान Shiva और माता Parvati के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है।

नेशनल डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। यह पावन पर्व भगवान Shiva और माता Parvati के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और विशेष पूजा-अर्चना का अत्यंत महत्व है।

पंचांग के मुताबिक चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 5:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की शाम 5:34 बजे तक रहेगी। निशिता काल (मध्यरात्रि) में की गई पूजा को सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पर कौन-कौन से दान विशेष फल देने वाले माने जाते हैं।

1. अन्न और सफेद वस्तुओं का दान – सबसे बड़ा पुण्य

महाशिवरात्रि पर अन्नदान को सर्वोच्च दान कहा गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना या चावल, गेहूं, चीनी जैसे कच्चे अनाज देना अत्यंत शुभ माना जाता है। चूंकि भगवान शिव को सफेद रंग प्रिय है, इसलिए दूध, दही, घी या अन्य सफेद खाद्य पदार्थों का दान भी विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है और घर में समृद्धि बनी रहती है।

2. वस्त्र और सुहाग सामग्री का दान – वैवाहिक जीवन के लिए शुभ

स्वच्छ वस्त्र, विशेषकर सफेद या पीले रंग के कपड़े दान करना लाभकारी माना गया है। यह पर्व शिव-पार्वती विवाह की स्मृति से जुड़ा है, इसलिए विवाहित महिलाओं को चुनरी, चूड़ियां, सिंदूर या बिंदी जैसी सुहाग सामग्री भेंट करना दांपत्य जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।

3. तिल और गुड़ का दान – कष्टों से मुक्ति का उपाय

काले तिल का दान बाधाओं को दूर करने और रुके कार्यों में गति लाने के लिए शुभ माना जाता है। गुड़ और घी का दान स्वास्थ्य और आत्मबल को बढ़ाने वाला बताया गया है। मंदिर या जरूरतमंद को गुप्त रूप से दान करने से इसका फल और अधिक मिलता है।

 दान करने का सही समय और तरीका

  • पूजा के बाद या प्रदोष काल में दान करना श्रेष्ठ माना गया है।
  • दान करते समय मन में अहंकार न रखें, बल्कि सेवा भाव रखें।
  • वस्तु साफ और उपयोगी होनी चाहिए।
  • दान से पहले मानसिक रूप से उसे महादेव को अर्पित करने का संकल्प लें।
  • धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया छोटा सा दान भी बड़े फल का कारण बनता है।

यह पर्व केवल उपवास या पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और करुणा का भी संदेश देता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया दान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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