Edited By Anu Malhotra,Updated: 29 Jan, 2026 01:15 PM

बिहार की राजधानी में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही एक मासूम छात्रा की संदिग्ध मौत और यौन शोषण का मामला अब एक बेहद पेचीदा और डरावने मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है, उसने न केवल जांच...
नेशनल डेस्क: बिहार की राजधानी में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही एक मासूम छात्रा की संदिग्ध मौत और यौन शोषण का मामला अब एक बेहद पेचीदा और डरावने मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है, उसने न केवल जांच की दिशा बदल दी है, बल्कि पूरे पटना को सन्न कर दिया है। अब तक पुलिस और जनता की शक की सुई हॉस्टल के अधेड़ उम्र के मालिक पर टिकी थी, लेकिन विज्ञान ने एक बिल्कुल अलग कहानी बयां की है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट का 'DNA' धमाका
जांच के दौरान पीड़िता के कपड़ों पर जो जैविक साक्ष्य (स्पर्म) मिले थे, उनके सूक्ष्म विश्लेषण से एक बड़ा सुराग लगा है। एफएसएल सूत्रों के मुताबिक, यह नमूना किसी 18 से 21 साल के युवक का है। इस खुलासे ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की मुख्य आरोपी के रूप में भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि उम्र का यह अंतराल किसी हमउम्र या किसी युवा परिचित की ओर इशारा कर रहा है।
क्या कोई 'करीबी' है असली गुनाहगार?
इस नई जानकारी के बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रडार बदल ली है। अब पुलिस उन चेहरों की तलाश कर रही है जो छात्रा के बेहद करीब थे:
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क्या वह हॉस्टल में आने-जाने वाला कोई बाहरी युवक था?
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क्या मृतका का कोई दोस्त या रिश्तेदार इस घिनौने अपराध में शामिल है?
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हॉस्टल के कर्मचारियों या वहां के परिवेश से जुड़े युवाओं की सूची फिर से खंगाली जा रही है।
सुसाइड के दावे से 'पोस्टमॉर्टम' के सच तक
यह मामला शुरुआत से ही पुलिसिया लापरवाही की भेंट चढ़ता दिखा। 6 जनवरी को जब छात्रा बेहोश मिली और 11 जनवरी को अस्पताल में उसकी सांसे थमीं, तब खाकी इसे 'नींद की गोलियों' और 'टाइफाइड' से जोड़कर खुदकुशी बताने पर तुली थी। लेकिन परिवार के अडिग संघर्ष और अंततः पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। रिपोर्ट में शरीर और नाजुक अंगों पर चोट के निशान मिले, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मौत से पहले छात्रा एक बर्बर हमले और दरिंदगी का शिकार हुई थी।
जांच में कोताही और गिरती गाज
इंसाफ की मांग को लेकर पटना की सड़कों पर आक्रोश है। पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के 20 दिन बाद केस में 'पॉक्सो एक्ट' जोड़ा गया। इस घोर लापरवाही के आरोप में:-
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चित्रगुप्त नगर की SHO रोशनी कुमारी को निलंबित किया गया।
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दारोगा हेमंत झा पर भी निलंबन की गाज गिरी है।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सख्त सजा का भरोसा दिलाया है, लेकिन पीड़ित पिता के आंसू पुलिसिया तंत्र पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल SIT ने आधा दर्जन संदिग्धों के डीएनए (DNA) सैंपल लिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 18-21 साल के उस 'गुमनाम चेहरे' का मिलान इन सैंपलों से होता है या कातिल अभी भी पुलिस की पकड़ से मीलों दूर है।