चीन-तुर्किए के बाद पाकिस्तान की मिलिट्री पावर बढ़ाने के लिए आया तीसरा देश सामने, नाम सुनकर चौंक जाएंगे

Edited By Updated: 22 May, 2025 08:09 AM

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जब दुनिया आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश दे रही है, ऐसे में पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई करने वाले देशों की सूची चौंकाने वाली है। चीन और तुर्किए जैसे अपेक्षित नामों के साथ नीदरलैंड्स जैसे शांतिप्रिय यूरोपीय देश का नाम सामने आना भारत के लिए एक...

नेशनल डेस्क: जब दुनिया आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश दे रही है, ऐसे में पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई करने वाले देशों की सूची चौंकाने वाली है। चीन और तुर्किए जैसे अपेक्षित नामों के साथ नीदरलैंड्स जैसे शांतिप्रिय यूरोपीय देश का नाम सामने आना भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि चीन के बाद पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा हथियार देने वाला दूसरा देश अब नीदरलैंड्स है, चीन सबसे पहले नंबर पर है वहीं तुर्की तीसरे नंबर पर है।

एस. जयशंकर की यूरोप यात्रा और एक कूटनीतिक संकेत
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों तीन यूरोपीय देशों के दौरे पर हैं – जर्मनी, डेनमार्क और नीदरलैंड्स। अपने छह दिवसीय दौरे की शुरुआत उन्होंने 19 मई को नीदरलैंड्स से की, जो ऐसे समय में बेहद अहम मानी जा रही है जब भारत, पाकिस्तान को हथियार सप्लाई करने वाले देशों को लेकर अपना विरोध स्पष्ट करना चाहता है। यह जयशंकर का ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय दौरा भी है।

नीदरलैंड्स से जयशंकर की मुलाकात – आतंकवाद पर एकजुटता का संदेश
नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक स्कोफ से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं पहुंचाईं और आतंकवाद के खिलाफ नीदरलैंड्स की स्पष्ट नीति की सराहना की। हालांकि सवाल यह है कि क्या यह सराहना हथियारों के सौदेबाजी पर पर्दा डाल सकती है?

पाकिस्तान को क्यों और क्या देता है नीदरलैंड्स?
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान को उसके 5.5% हथियार नीदरलैंड्स से मिलते हैं, जो उसकी नौसेना के लिए तैयार किए गए हैं। इसमें माइन हंटर्स और पेट्रोल शिप्स शामिल हैं, जो समुद्री माइनों का पता लगाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। 1990 के दशक से लेकर 2021 तक पाकिस्तान ने नीदरलैंड्स से नौसैनिक उपकरणों की खरीद जारी रखी है।

भारत के पास है बड़ा इकोनॉमिक दबाव का विकल्प
भारत और नीदरलैंड्स के बीच 22 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जबकि पाकिस्तान का पूरा यूरोप के साथ व्यापार महज़ 15 अरब डॉलर के आसपास है। ऐसे में भारत के पास यह मजबूत तर्क और दबाव है कि वह नीदरलैंड्स को समझा सके कि आतंकवाद को हथियार देना उसकी वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

क्या नीदरलैंड्स पाकिस्तान के लिए भारत से रिश्ते बिगाड़ेगा?
यह सवाल अब नीदरलैंड्स के रणनीतिकारों के सामने है। भारत सिर्फ एक ट्रेड पार्टनर नहीं, बल्कि एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति है – जिस पर यूरोप की टेक्नोलॉजी, डिफेंस और इनोवेशन सेक्टर भी निर्भर करते जा रहे हैं। ऐसे में क्या नीदरलैंड्स, तुर्किए की तरह पाकिस्तान की तरफ झुककर भारत के साथ अपने संबंधों में दरार आने देगा?

भारत की नई रणनीति – पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर बेनकाब करने की तैयारी
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत अब पाकिस्तान के दोहरे चेहरे को दुनिया के सामने लाने के लिए कूटनीतिक मोर्चा खोल रहा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं और मंत्रियों की 7 टीमें 32 देशों का दौरा करेंगी, ताकि यह बताया जा सके कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद को संरक्षण देता है और दुनिया को धोखा देता है।


 

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